सत्संग का अर्थ-एक लोटा पानी

उमेशचन्द यादव

बलिया (उत्तरप्रदेश) 

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भारतीय संस्कृति और समाज में सत्संग को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सत्संग से हमें अच्छे संस्कार मिलते हैं जिनसे हमारा जीवन सुखमय बनता है। सामान्य अर्थ में सत्संग का मतलब सज्जन लोगों के संग से लिया जाता है,लेकिन आध्यात्मिक  विचार मंथन के अनुसार सत्संग का विशेष अर्थ है-‘एक लोटा पानी’। इस अर्थ को जानकर आपके मन में विचारों की तरंगों ने हिलोरे लेना तो शुरू कर ही दिया होगा और यह सार्थक भी है। आइए मैं आपके मन के बोझ को हल्का और मन की तरंगों को शांत करने का प्रयास करता हूँ।

सत्संग का अर्थ ‘एक लोटा पानी ’ के मतलब को उदाहरण के साथ समझिए। हम अपने दैनिक जीवन में दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अधिकतर पानी पर आधारित होते हैं,क्योंकि पानी बिना जग सूना-सूना। हमारा भारत वर्ष गाँवों का देश कहा जाता है। गाँवों में पानी नलकूप से निकाला जाता है। जब कभी भूगर्भिक जल स्तर घट जाता है अर्थात भूमि के नीचे का पानी कम हो जाता है तब या किसी अन्य कारण से हमारे नल पानी छोड़ देते हैं अर्थात उनसे पानी नहीं आता है, उस स्थिति में नल से पानी निकालने के लिए हम नल का मुँह बंद करके एक लोटा पानी डालते हैं और फिर नल को चलाते हैं। तब नल से हमें पानी मिलता है अर्थात नल का संबंध भूगर्भिक जल से जुड़ जाता है और वह सक्रिय हो जाता है। ठीक इसी प्रकार जन्म लेने के बाद जब मनुष्य माया- मोह में पड़कर भगवान को भूल जाता है,तब सत्संग ही एक ऐसा माध्यम है जो मनुष्य को फिर से भगवान से जोड़ने में हमारी मदद करता है। इस प्रकार सिद्ध हो जाता है कि सत्संग का अर्थ ‘एक लोटा पानी’ उचित है,क्योंकि एक लोटा पानी भूगर्भिक जल से नल को जोड़ता है और सत्संग परमात्मा से आत्मा को, अर्थात आध्यात्म से,जहाँ जाकर मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है।

                    अब हुई न मन की शांति और ज्ञान में वृद्धि। तो आइए हम सब सत्संग से जुड़ें और अपने जीवन को धन्य बनाएँ। यह जीवन,यह समय फिर हमें कभी नहीं मिलेगा। इसलिए सदैव समय का सदुपयोग करना चाहिए और अच्छे लोगों के संग में रहना चहिए,क्योंकि अच्छाई-अच्छे लोगों के संपर्क में रहने से ही आती है। अतः हमें अनुशासन में रहकर समय का सदुपयोग और माता- पिता तथा गुरुजनों का आदर व सम्मान करना चाहिए।

परिचय-मेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं। लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।

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