सदा मुस्कुराते चलो 

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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जिंदगी में सदा मुस्कुराते चलो।
जख्म खाकर सभी को हँसाते चलो॥

पेश आओ ज़रा आदमी की तरह,
प्यार हरदम जहां में लुटाते चलो।

दर्द दिल में छुपाना,दिखाना नहीं,
आइना जिन्दगी को दिखाते चलो।

राह में गर मिलें यार कोई गिरा,
पास आकर उन्हें भी उठाते चलो।

भूल जाना नहीं इस वतन को कभी,
जान ‘बोधन’ सदा ही लुटाते चलो॥

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