सपनों के पनघट पे

ओमप्रकाश बिन्जवे `राजसागर`
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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दो पल सपनों के पनघट पे ठहरा करो।
पलकों की मुंडेरों से,अंतर्मन में झाँका करो।

बहुत प्यासे है हम प्यार की बूंद-बूंद को,
प्रीत की घटा मेरे आँगन भी बरसा करो।

ह्रदय में प्रीत का मोती छुपा रखा है मैंने,
तुम उथले सागर की सीपियाँ न माँगा करो।

शहर का नीम अन्धेरा,सन्नाटा,बेकल मन,
स्पन्दन बन के हृदय में धड़का करोl

यौवन की देहरी पे उमड़ी है ये अभिलाषा,
बिखर जाए दूरियों के पुल कुछ ऐसा करो।

प्रिया प्रगति के पथ पर चाहिए साथ तुम्हारा,
मेरी प्रेरणा बन के दीपशिखा-सी जला करो।

निंदयारी पलकों के सपने बासंती हो जाये,
अपने अधरों से मेरे गीतों को छुआ करोll

परिचय-ओमप्रकाश बिन्जवे का साहित्यिक नाम `राजसागर` हैl आप पश्चिम मध्य रेल में स्टेशन प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैंl जन्म स्थल-ग्राम पाढर जिला बैतूल (म.प्र.)हैl शिक्षा-एम.ए.(अर्थशास्त्र)हैl इनका वर्तमान निवास होशंगाबाद रोड (भोपाल,मध्यप्रदेश) पर हैl आपकी रूचि-लेखन,फिल्म निर्माण, पर्यटन तथा संगीत में हैl आपका लक्ष्य-फिल्म निर्माण,संगीत स्टूडियो और पुस्तक प्रकाशन का हैl श्री बिन्जवे की उपलब्धि एक पत्रिका में सम्पादक (भोपाल) सहित पत्रकारिता करना एवं प्रकाशित पुस्तकें-खिड़कियाँ बन्द है(ग़ज़ल संग्रह),चलती का नाम गाड़ी (उपन्यास) और बेशरमाई तेरा आसरा(व्यंग्य संग्रह) हैl हिंदी को आगे बढ़ाना ही आपकी लेखनी का उद्देश्य है। कार्यालय में हिंदी में कार्य करने के लिए आपको सम्मानित किया जा चुका है। बहुआयामी प्रतिभा के धनी श्री बिन्जवे की रचनाएं कई पत्रों में छपी हैंl आपको काव्य क्षेत्र में आपको अखबारों सहित केन्द्रीय संस्कृति मंत्री के कर कमलों से `काव्य रश्मि`सम्मान(दिल्ली) से नवाजा जा चुका है। साथ ही संकलन का विमोचन भी मंत्री द्वारा किया गया थाl 

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