सफलता का रहस्य:लक्ष्य और उद्देश्य

सुश्री नमिता दुबे
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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जीवन में सफल होना तो सब चाहते हैं,और उसके लिए कई उपाधियाँ भी लेते हैं,किन्तु केवल उच्च शिक्षा तथा अनगिनत उपाधियाँ जीवन की सफलता को निर्धारित नहीं कर सकती हैI जीवन में बड़े उद्देश्य पाने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाना बहुत आवश्यक हैI लक्ष्य के बिना व्यक्ति इधर उधर भटकता रहता हैI अगर आप किसी से उनकी जिंदगी का कोई बड़ा मकसद पूछेंगे तो वे आपको अस्पष्ट जवाब देंगे,जैसे-मैं सफल होना चाहती हूँ,खुश रहना चाहती हूँ,अच्छा जीवन गुजारना चाहती हूँ,और यहीं पर रुक जाएगीI

जीतने वाले लक्ष्य को देखते हैं और हारने वाले रूकावटों को,अतः लक्ष्य इतने बड़े होना चाहिए कि हमें प्रेरणा दे सकें,मगर असलियत से इतने दूर भी न हों कि हम निराश हो जाएंI लक्ष्य हासिल करने में कई रूकावटें आती हैं,किन्तु उसे पाने के सदैव वैकल्पिक रास्ते भी हमें अपने समक्ष रखना होते हैंI अगर आप किसी सड़क पर जा रहे हैं और आपको बीच में `रास्ता बंद है` की सूचना दिखाई देती है तो आप वहीं रुक नहीं जाते,न ही घर वापस लौट आते हैंl रास्ता बंद है इसका मतलब है कि आप उस रास्ते से अपने लक्ष्य पर नहीं पहुँच सकते हैं,इसलिए वहाँ पहुँचने के लिए किसी दूसरे रास्ते से जाना होगाI लक्ष्य निर्धारण में इन पंचक से बचकर रहिए-

#खुद को नाकाबिल समझनाl

#मैं जहां हूँ,जैसी हूँ सुरक्षित हूँl

#इस क्षेत्र में पहले से ही बहुत लोग हैंl

#माँ-बाप या दोस्तों की इच्छा से भविष्य का चुनाव करनाl #पारिवारिक जिम्मेदारियांl

निश्चित तौर से आप जो करना चाहतेहैं,वही करें क्योंकि इच्छित लक्ष्य से शारीरिक शक्ति,ऊर्जा और उत्साह का संचार होता हैl अपने-आप में निवेश करें,ऐसी चीजें ख़रीदें ,जिनसे मानसिक योग्यता ओर शक्ति बढ़ेl शिक्षा में निवेश करें,विचारशील सामग्री में निवेश करेंI अपने जीवन को किस्मत के भरोसे न छोड़ें,जब आप पर आपका लक्ष्य हावी हो जाएगा तो आप पाएंगें कि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सही फैसले कर रहे हैंI यही छोटे-छोटे लक्ष्य जीवन के बड़े उद्देश्य को पाने में सीढ़ी आपकी सीढ़ी बनेंगे और आपके जीवन को सार्थक कर देंगेI बस लक्ष्य तय करें,और जीवन का असली आनंद लेंl

परिचय : सुश्री नमिता दुबे का जन्म ग्वालियर में ९ जून १९६६ को हुआ। आप एम.फिल.(भूगोल) तथा बी.एड. करने के बाद १९९० से वर्तमान तक शिक्षण कार्य में संलग्न हैं। आपका सपना सिविल सेवा में जाना था,इसलिए बेमन से शिक्षक पद ग्रहण किया,किन्तु इस क्षेत्र में आने पर साधनहीन विद्यार्थियों को सही शिक्षा और उचित मार्गदर्शन देकर जो ख़ुशी तथा मानसिक संतुष्टि मिली,उसने जीवन के मायने ही बदल दिए। सुश्री दुबे का निवास इंदौर में केसरबाग मार्ग पर है। आप कई वर्ष से निशक्त और बालिका शिक्षा पर कार्य कर रही हैं। वर्तमान में भी आप बस्ती की गरीब महिलाओं को शिक्षित करने एवं स्वच्छ और ससम्मान जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। २०१६ में आपको ज्ञान प्रेम एजुकेशन एन्ड सोशल डेवलपमेंट सोसायटी द्वारा `नई शिक्षा नीति-एक पहल-कुशल एवं कौशल भारत की ओर` विषय पर दिए गए श्रेष्ठ सुझावों हेतु मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा और कौशल मंत्री दीपक जोशी द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा श्रेष्ठ शिक्षण हेतु रोटरी क्लब,नगर निगम एवं शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संगठन द्वारा भी पुरस्कृत किया गया है।  लेखन की बात की जाए तो शौकिया लेखन तो काफी समय से कर रही थीं,पर कुछ समय से अखबारों-पत्रिकाओं में भी लेख-कविताएं निरंतर प्रकाशित हो रही है। आपको सितम्बर २०१७ में श्रेष्ठ लेखन हेतु दैनिक अखबार द्वारा राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा गया है। आपकी नजर में लेखन का उदेश्य मन के भावों को सब तक पहुंचाकर सामाजिक चेतना लाना और हिंदी भाषा को फैलाना है।

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