सफाई से नहीं इंकार,फिर भी `पानी पूरी` से बे‍इंतिहा प्यार!

अजय बोकिल
भोपाल(मध्यप्रदेश) 

******************************************************************

सेहत के लिए ही सही,किसी शहर में हर दिल अजीज `पानी पूरी` पर प्रतिबंध लगा दिया जाए तो पानी पुरी प्रेमियों के लिए इससे बुरी खबर शायद कोई हो नहीं सकती,क्योंकि पानी पूरी का मतलब है जिसे देखकर ही मुंह में पानी आना। गुजरात के वडोदरा (बड़ौदा)नगर पालिका ने इस मानसून के मद्देनजर शहर में पानी पूरी की बिक्री पर रोक लगा दी है। नपा का कहना है कि,पानी पूरी बनाने में साफ-सफाई का समुचित ध्यान नहीं रखा जाता। इसके खाने से लोगों को टाइफाइड,पीलिया और फूड प्वाइजनिंग जैसी बीमारियां हो रही थीं। इसके लिए नपा अधिकारियों ने कई जगह छापे मारे और करीब चार हजार किलो पानी पूरी,साढ़े तीन हजार‍ किलो आलू और काबुली चना तथा पानी पूरी का १२०० लीटर चटपटा पानी बेरहमी से फेंक दिया। खबर में यह साफ नहीं है कि,यह पानी पूरी पर रोक कितने दिन के लिए है और इसके हटने तक बडोदरावासी किस तरह अपने दिन गुजारेंगे ? स्वच्छता के आग्रह से इंकार नहीं,लेकिन चाट और खासकर पानी पूरी प्रेमियों के लिए यह खबर गाज गिरने जैसी है। यूं पानी पुरी हर मौसम के लिए मुफीद और जरूरी है,लेकिन रिमझिम बारिश में पानी पूरी गटकने का अलग ही मजा है। वैसे भी यह शुद्ध भारतीय व्यंजन है और पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की पसंद है। पानी पूरी को कई नामों से जाना जाता है। पश्चिमी भारत में यह पानी पूरी है तो उत्तर भारत और दिल्ली में ये `गोल गप्पा` है। गोल गप्पा इसलिए कि,इसे मुंह में एक साथ गपा जाने में ही रोमांच है। इसे फुल्की,फुचका,पानी पतासे,गुप-चुप और पकौड़ी के नाम से भी जाना जाता है। पानी पुरी का शाब्दिक अर्थ है `पानी की रोटी।` पानी पूरी शब्द चलन में कैसे आया,यह शोध का विषय है,लेकिन इसका आकार छोटी कड़क पूरी की तरह और इसकी जान इसके चटपटे पानी में है। इसे नाश्ते में भी खाया जाता है,लेकिन पार्टियों में लोग अक्सर इसे मुख्य व्यंजन निपटाने के बाद सूतना पसंद करते हैं। कई लोगों के लिए मुखशुद्धि की तरह है। लिहाजा शादी या अन्य पार्टियों में पानी पूरी का स्टाल उतना ही जरूरी माना जाता है,‍जितना दुल्हन का मंगल सूत्र। गुजरात में लोग शराबबंदी भले झेल गए हों,लेकिन पानी पूरी पर रोक शायद ही गवारा करें। गुजरात ही क्यों,पानी पूरी इस देश की ज्यादातर आबादी के मुंह लगी है। यह हकीकत में धर्म निरपेक्ष है,और अपने झन्नाटेदार स्वाद और उसे खाने की बेतकल्लुफ अदा के कारण हर दिल अजीज है। और फिर गुजरात में तो पानी पूरी तक तक में व्यापार नवाचार हो चुका है। पिछले ही साल बापू के जन्मस्थान पोरबंदर में एक गोल गप्पा व्यवसायी ने जियो रिलायंस अनलिमिटेड की तर्ज पर दो योजना घोषित की थीं,जिसके तहत पहली योजना में ग्राहक १०० रूपए में रोज और हजार रू. में पूरे माह असीमित गोल गप्पे खा सकते थे। बताया जाता है कि इस योजना के बाद अंबानी की तरह उसका धंधा भी खूब फला-फूला। भारतीय संस्कृति पर गर्व करने वालों के लिए भी पानी पूरी देशाभिमान का विषय इसलिए है ‍कि,पिज्जा-बर्गर के दौर में भी पानी पूरी अपनी हैसियत कायम रखे हुए है। इसका आविष्कार भी भारतीयों ने ही किया है। भरी सड़क पर किसी खोमचे पर बेतकल्लुफी के साथ पानी पूरी खाना हम भारतीयों की जीवटता की निशानी है। इसे खाने वाले की रससिक्त मुद्राएं जीवन के प्रति रस जगाती हैं। बताया जाता है कि प्राचीन काल में पानी पूरी सबसे पहले पानी मगध(आज का दक्षिण बिहार) में बनाई गई। वहां इसे `फुल्की` नाम से ही जाना जाता है। पानी पूरी के जन्म की एक कथा महाभारत आख्यान से भी जुड़ती है। कहते हैं कि,जब द्रौपदी शादी के बाद ससुराल आई तो पांडव वनवास में थे। तब सास कुंती ने नई बहू से वहां उपलब्ध आटे और आलू से ही कुछ खाने के लिए बनाने को कहा। तब कुंती ने पानी पूरी(फुल्की)बनाई। तब से आज तक यह हमारी खाद्य संस्कृति का अहम हिस्सा है। पाक शास्त्र की दृष्टि से भी पानी पूरी बनाने की विधि बहुत कठिन नहीं है। आजकल तो यह मशीन से भी बनती है। रवे और मैदे से बनी पानी पूरी ज्यादा खस्ता होती है। पानी पूरी के भी कई प्रकार हैं,जैसे-खट्टी पानी पूरी,मीठी पानी पूरी,तीखी पानी पूरी आ‍दि। यूं खाली पूरी भी खाने में अच्छी लगती है,लेकिन बिना चटपटे पानी के वह वैसी ही है,जैसे बिना चाशनी के जलेबी। दरअसल पानी पूरी का पानी ही स्वाद की असली कसौटी है। पानी और पूरी का रिश्ता तबले और डग्गे जैसा है। इसका पानी उसे बनाने वाले के हाथ(और पसीने का भी)का कमाल होता है। अमूमन इसे इमली,सोंठ,पुदीना,गुड़ और नमक आदि मिलाकर बनाया जाता है। कुछ लोग तीखा पानी पसंद करते हैं,तो कुछ खट्टे-मीठे स्वाद वाला। आजकल इसके आधुनिक संस्करण जैसे-पानी पूरी मार्गरीटा,पानी पूरी शॉटस और चाकलेट पानी पूरी भी आ गए हैं। यहां तक कि,आइसक्रीम पानी पूरी भी लोकप्रिय हो रही है। हालांकि,पानी पूरी को हाई कैलोरी खाद्य माना जाता है, लेकिन स्वाद की दुनिया के सिपाही ऐसी बातों से डरा नहीं करते। पानी पूरी खुद स्त्री लिंगी शब्द है,और इस नाते वह महिलाओं की भी पहली पसंद है। चाट की दुकानों मे सबसे ज्यादा जमावड़ा इन्हीं का मिलेगा। तीन साल पहले झांसी में एक किशोरी ने इसलिए खुदकुशी कर ली थी कि,घरवालों ने उसे पानी पूरी खाने के ‍लिए पैसे देने से इंकार कर दिया था। अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पानी पूरी व्यापार की सही-सही जानकारी होती तो वे युवाओं को पकौड़ों के बजाए पानी पूरी बनाने की सलाह देते। इस पानी पूरी महात्म्य के बावजूद अगर बड़ोदरा नगर पालिका ने इस पर रोक लगाने की हिमाकत की है तो पानी पूरी सम्प्रदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा क्यों‍कि,यह एक ऐसा व्यंजन है,जिसमें सफाई से ज्यादा स्वाद की अहमियत है। दस्ताने पहनकर गोल गप्पे परोसना वैसा ही है,जैसा-कैलोरी चार्ट देखकर रबड़ी खाना। ऐसी चीजों का केवल भरपूर आनंद लिया जाता है। ऐसा आनंद,जो खाने के सुरूर को अपने चरम पर पहुंचा दे। यह तो `खाए जाओ` वाली संस्कृति का अग्रदूत है। पानी पूरी की बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है,लेकिन उनका क्या,जो पानी पूरी के लिए ही जी रहे हैं ? किसी कवि ने कहा भी है-“चल तो देते हम भी हिमालय ये मोह सब त्याग के, पानी पूरी तेरा ही फिर खयाल ज़हन में आ जाता है।’’

परिचय-अजय बोकिल की जन्म तारीख १७ जुलाई १९५८ तथा जन्म स्थान इंदौर हैl आपकी शिक्षा-एमएससी( वनस्पति शास्त्र) और एम.ए.(हिंदी साहित्य)हैl आपका निवास मध्यप्रदेश के भोपाल में हैl पत्रकारिता का ३३ वर्ष का अनुभव रखने वाले श्री बोकिल ने शुरूआत इंदौर में सांध्य दैनिक में सह-सम्पादक से की है। इसके बाद से अन्य दैनिक पत्रों में सह-सम्पादक, सहायक सम्पादक और फिर सांध्य दैनिक में सम्पादक रहकर वर्तमान में एक अन्य सांध्य दैनिक में वरिष्ठ सम्पादक के रूप में लेखन यात्रा जारी हैl आपकी लेखन विधा मुख्य रूप से आलेख और स्तम्भ ही हैl पं.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि में श्री अरविंद पीठ पर शोध अध्येता के रूप में कार्यरत हैं,साथ ही `अरविंद की संचार अवधारणा’ पुस्तक प्रकाशित हुई है। प्रकाशन रूप में आपके खाते में कहानी संग्रह ‘पास पड़ोस’ सहित कई रिपोर्ताज व आलेख हैं। मातृभाषा मराठी में भी लेखन करने वाले श्री बोकिल दूरदर्शन,आकाशवाणी तथा विधानसभा के लिए समीक्षा लेखन कर चुके हैं। पुरस्कार के रूप में आपको स्व.जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी उत्कृष्ट युवा पुरस्कार,मप्र मराठी साहित्य संघ द्वारा जीवन गौरव पुरस्कार,मप्र मराठी अकादमी द्वारा मराठी प्रतिभा सम्मान व कई और सम्मान भी दिए गए हैं। विदेश यात्रा के तहत समकालीन हिंदी साहित्य सम्मेलन कोलम्बो( श्रीलंका)में सहभागिता सहित नेपाल व भूटान का भ्रमण किया है।

Hits: 17

आपकी प्रतिक्रिया दें.