सबको ही आव दें

प्रदीपमणि तिवारी `ध्रुव भोपाली`
भोपाल(मध्यप्रदेश)
*********************************************************************************************
एहसान किसी का भी लेना ये फिजूल है।
मर जाएं भीख माँगना ये नहीं कुबूल है।
मर जाए भूखा शेर घास खा सके नहीं,
बोटी वो खाए मत कहो ऊल-जलूल है।
आँखों में खटक जाए जब दुश्मन पड़ोस का,
चुभता है दिल में खूब वो लगता बबूल है।
मानिन्द दरिया के रहें सबको ही आव दें,
अपना उसूल रब का भी ये तो उसूल है।
बसता है दिल में सबके होती ख़बर नहीं,
आया वो आसमाँ से जान लो रसूल है।
मरना वतन के वास्ते मज़हब बड़ा है ये,
उनको क़ुबूल है ये तो सबको क़ुबूल है।
हम छू सके नहीं फ़लक किस्मत ‘ध्रुव’ क्या करे,
बाबाओं के चक्कर लगाएं अपनी भूल है॥
परिचय-प्रदीपमणि तिवारी का लेखन में उपनाम `ध्रुव भोपाली` हैl आपका कर्मस्थल और निवास भोपाल (मध्यप्रदेश)हैl आजीविका के लिए आप भोपाल स्थित मंत्रालय में सहायक के रुप में कार्यरत हैंl लेखन में सब रस के कवि-शायर-लेखक होकर हास्य व व्यंग्य पर कलम अधिक चलाते हैंl इनकी ४ पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैंl गत वर्षों में आपने अनेक अंतर्राज्यीय साहित्यिक यात्राएँ की हैं। म.प्र.व अन्य राज्य की संस्थाओं द्वारा आपको अनेक मानद सम्मान दिए जा चुके हैं। बाल साहित्यकार एवं साहित्य के क्षेत्र में चर्चित तथा आकाशवाणी व दूरदर्शन केन्द्र भोपाल से अनुबंधित कलाकार श्री तिवारी गत १२ वर्ष से एक साहित्यिक संस्था का संचालन कर रहे हैं। आप पत्र-पत्रिका के संपादन में रत होकर प्रखर मंच संचालक भी हैं

Hits: 8

आपकी प्रतिक्रिया दें.