समझा देह

अजय जैन ‘विकल्प
इंदौर(मध्यप्रदेश)
विशेष वरिष्ठ संवाददाता-(दैनिक स्वदेश समाचार-पत्र, इंदौर)
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बेबस बेटी,
हवस के भेड़िए
कैसी दुनिया।
मासूम परी,
इंसान हुआ कैसा
रौंदे सपने।
समझा देह,
कल्पना से परे
शर्मिंदा सब।
सोचिए जरा,
समाज से पहल
कैसे हो विश्वास।
चिड़िया-सी वो,
पापी को है मिटाना,
नारी बचाना।

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