समाज और राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी

 

कैलाश मंडलोई ‘कदंब’
रायबिड़पुरा(मध्यप्रदेश)

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आज आधुनिकता के दौर में सामाजिक मूल्यों एवं नैतिकता का पतन हो रहा है। आज हमारा समाज और राष्ट्र संधिकाल के दौर से गुजर रहे हैं। कुछ रुढ़िवादिता कम हुई है तो वहीं सामाजिक बन्धनों में ढिलाई भी आई है। आज भी अनेक बुराईयां समाज में व्याप्त हैं,जिनके विरूद्ध खड़े होने एवं उनको समाप्त करने की हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। न हम बुराई को अपनाएंगे और न किसी को बुराई का शिकार होने देंगे। जहां राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी की बात है तो हमें एक राष्ट्रप्रेमी होकर तन-मन-धन से समर्पण करना होगा। इसके लिए हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम ऐसा कोई भी कार्य नहीं करें,जिससे राष्ट्र को नुकसान हो। हम समानता,सदभाव और आपसी भाईचारे की भावना से आपस में एक-दूसरे से ऐसा व्यवहार करें कि देश में अमन-चैन हो एवं सभी का आर्थिक एवं सामाजिक विकास होl यही हमारी समाज एवं राष्ट्र के प्रति नैतिक जिम्मेदारी है। हम अपने निहित कार्य को सच्ची लगन,ईमानदारी,समर्पण एवं अथक परिश्रम से पूरा करें तो हम सच्चे अर्थों में समाज एवं राष्ट्र की ही सेवा कर रहे हैं। भ्रष्टाचारी,बेईमानी,रिश्वतखोरी,हरामखोरी,बदनीयती, बदचलनी से बचना एवं इनके खिलाफ आवाज उठाकर एक स्वच्छ समाज का निर्माण करना ही सच्ची राष्ट्र भक्ति है। क्योंकि,एक साफ-स्वच्छ एवं उच्च आदर्शों वाले समाज में ही सच्चे राष्ट्र भक्त पैदा होते हैं। आज सामाजिक बन्धनों की ढिलाई के फलस्वरूप लोगों में नैतिक पतन के लक्षण साफ नजर आ रहें है। समाज में आदर्श एवं मान-सम्मान की भावना का ह्रास हो रहा है। उच्छ्रंखलता का नाच शहरों से लेकर गांवों तक देखा जा सकता है। हम अपनी वैदिक संस्कृति,वसुधैव कुटुम्बकम को भूलते जा रहे हैंl देश में बढ़ते वृद्धाश्रम तथा विघटित होते परिवार इसका प्रमाण हैंl आज जाति-धर्म की राजनीति भी राष्ट्रीय एकता में बाधक है। अतः इन सब विद्रूपताओं के विरुद्ध आवाज उठाकर एक स्वच्छ समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अपनी तन-मन-धन से सेवा अर्पित करना ही हमारी समाज एवं राष्ट्र के प्रति सच्ची जिम्मेदारी है। आओ हम सब मिलकर एक बेहतर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में सहयोग दें।

 परिचय-कैलाश मंडलोई का साहित्यिक उपनाम ‘कदंब’ हैl आपका निवास रायबिड़पुरा(जिला खरगोन,म.प्र.)में हैl एम.ए.(हिन्दी) और डी.एड. शिक्षित श्री मंडलोई का जन्म १५ जून १९६७ को हुआ हैl पेशे से आप शिक्षक होकर लेखन करते हैंl आपने सेवा कार्य के तहत विशेष रुचि लेकर शाला परिसर में १००० पौधों का वृक्षारोपण कर उद्यान तैयार किया है।अन्य शैक्षिक गतिविधियों में अतिरिक्त समय में छात्र-छात्राओ को पढ़ाना,सुबह योग की कक्षा लगाना आदि शामिल हैl शैक्षिक सामग्री का निर्माण व प्रदर्शन,६०० से अधिक विज्ञान एवं गणित के प्रारुप(माडल) का अनुपयोगी वस्तुओं से निर्माण,१००० से अधिक कटाउट्स,१००० से अधिक चार्ट,अख़बार की कतरनें आदि शामिल है। अन्य शालाओं के छात्र-छात्राओं को अपनी शाला में बुलाकर विज्ञान-गणित प्रारुप का प्रदर्शन करना,वाद-विवाद प्रतियोगिता,निबन्ध प्रतियोगिता और सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन सहित विभिन्न दिवसों तथा महापुरुषों के जन्मदिन पर सबको एकत्रित कर संगोष्ठियों का आयोजन करना आपकी पसंद का काम है। आपकी लेखन विधा-नई कविता,छंद,छंदमुक्त रचनाएं एवं आलेख आदि है।अनेक कवि सम्मेलनों में कविता पाठ कर चुके श्री मंडलोई के कई सामूहिक काव्य संग्रह हैं,जिसमें-वर्तमान सृजन,नव काव्यांजलि,एक पृष्ठ मेरा भी और छंद कलश आदि हैं, तो व्यक्तिगत प्रकाशित पुस्तक `साहित्यमेध` हैl अनेक पत्र-पत्रिकाओं तथा वेब पोर्टलों पर आपकी कविताएँ,कहानी,आलेख, तथा समीक्षा प्रकाशित हैl साहित्यिक क्षेत्र में आपको श्रेष्ठ रचनाकार,श्रेष्ठ टिप्पणीकार सम्मान सहित काव्य मार्तण्ड सम्मान,साहित्य संगम समीक्षाधीश,साहित्य अभ्युदय सम्मान के साथ ही व्याकरणशाला एवं छंदशाला में श्रेष्ठ प्रदर्शन के प्रमाण-पत्र मिले हैंl विशेष पुरस्कार में आपके पास कलेक्टर द्वारा सम्मान,जिला स्तर पर पर्यावरण पर सम्मान,जिला स्तर पर शिक्षक सम्मान हैl आप वर्तमान में साहित्यिक गतिविधियों में सक्रियता से में कार्यरत हैंl

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