समीकरण

डॉ.आभा माथुर
उन्नाव(उत्तर प्रदेश)
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बात उन दिनों की है जब मेरी आयु आठ या नौ वर्ष की थी। तब हमारे शहर में रेस्टोरेन्ट्स नहीं थे,उसके स्थान पर कई चाट वाले,आइसक्रीम वाले,कोल्डड्रिंक्स वाले,डबल रोटी (ब्रैड) वाले यानि कि चलते-फिरते रेस्तरां शहर की सड़कों पर घूम-घूमकर सामान बेचा करते थे। हम लोग कई बहनें थी,और चाट खाने की शौक़ीन थीं। उन दिनों लड़कियों का सड़क पर खड़े होकर चाट खाना अच्छा नहीं समझा जाता था,इसलिए घर के सामने चाट के ठेले को रोक लिया जाता और चाट ख़रीदकर घर के अन्दर ले जाकर खाई जाती।
चाट के कई ठेलों में से एक ठेला पंडित जी का था।उनकी चाट साफ़-सुथरी और स्वादिष्ट होती थी,इसलिए हम लोग उन्हीं से चाट ख़रीदते थे। मैं जब कभी उनका ठेला आते देखती ,बड़ी बहनों को सूचित कर देती तो ठेला रुकवा लिया जाता। हमारे घर में कोई लड़का तो था नहीं,दोनों भाई काफ़ी बड़े थे और बाहर रहते थे। बहनों में सबसे छोटी होने के कारण ठेले वाले से चाट लेकर अन्दर घर में देने का काम मेरे ही ज़िम्मे था। यह भी मैं ही याद रखती थी कि,किस व्यक्ति ने कितने पैसे या रुपए की चाट खाई। अन्त में सब राशि जोड़कर पंडित जी का हिसाब चुकता कर दिया जाता था।
एक दिन इसी प्रकार चाट समारोह हुआ। उस दिन एक बहन जो विवाहिता थीं,परन्तु उसी नगर में दूसरे मोहल्ले में रहती थीं,वह भी आई हुई थीं। उस दिन पंडित जी की हमारे घर में बहुत बिक्री हुई। अन्त में हिसाब करने के बाद पंडित जी ने एक स्पेशल पत्ता बनाकर मुझे दिया-`यह तुम्हारे लिए है।` `मगर मेरे पास तो पैसे नहीं हैंl` मेरा उत्तर सुनकर उन्होंने समझाया-`पैसे की कोई ज़रूरत नहीं है। यह तुम्हारे लिए है,बिना पैसे का।` कारण न समझते हुए भी मैंने पत्ता ले लिया और चाट खा ली।
बहुत समय बाद समझ आया कि,चाट वाले ने चाट की बिक्री का समीकरण बैठा लिया था। चाट का ठेला आने की सूचना देने और सबको चाट खिलवाने में मेरा ही तो प्रधान योगदान था।

परिचय-डॉ.आभा माथुर की जन्म तारीख १५ अगस्त १९४७ तथा जन्म स्थान बिजनौर (उत्तर प्रदेश)हैl आपका निवास उन्नाव स्थित गाँधी नगर में हैl 
उन्नाव  निवासी डॉ.माथुर की लेखन विधा-कविता,बाल कविताएं,लेख,बाल कहानियाँ, संस्मरण, लघुकथाएं है। सामाजिक रुप से कई संगठनों से जुड़कर आप सक्रिय हैं। आपकी पूर्ण शिक्षा फिलासाफी ऑफ डॉक्टरेट है। कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश है। सरकारी नौकरी से आप प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। साझा संग्रह में डॉ.माथुर की कई रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही अनेक रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हैं। सामाजिक मीडिया समूहों की स्पर्धाओं में आप सम्मानित हो चुकी हैं। इनकी विशेष उपलब्धि आँग्ल भाषा में भी लेखन करना है। आपकी लेखनी का उद्देश्य आत्म सन्तुष्टि एवं सामाजिक विसंगतियों को सामने लाना है, जिससे उनका निराकरण हो सके। आपमें दिए गए विषय पर एक घन्टे के अन्दर कविता लिखने की क्षमता है। अंग्रेज़ी भाषा में भी लिखती हैं।

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