सर्वोपरि राष्ट्रधर्म

संजीव शुक्ल ‘सचिन’ 
पश्चिमी चम्पारण(बिहार)
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जात धर्म भेद-भाव,नित्य दे रहे हैं घाव।
इनका बुरा प्रभाव,आप  जान जाइए॥
राजनेता देता घाव,नित्य चले नया दांव।
इनके कुप्रभाव से,राष्ट्र को बचाइए॥
साम दाम दण्ड भेद,मन में रहे न खेद।
राष्ट्र को बचाना है तो,कारवां बनाइए॥
रहे नहीं भेद-भाव,मन में न कोई दांव।
सफर भाईचारे का,आप अपनाइए॥
धर्म पे न हो बवाल,खुद से करें सवाल।
देश तोड़ने की बात,मन में न लाइए॥
सफर सदभाव का,विचार न दुराव का।
सबमें लगाव रहे,राह तो बनाइए॥
भ्रष्टाचारियों से लड़,इनके न पाँव पड़।
किस्से सारे इनके जो,राष्ट्र को सुनाइए॥
व्यभिचार घूसखोरी,राष्ट्रद्रोह कर चोरी।
इनकी करतूत जो,सबको दिखाइए॥
परिचय-संजीव शुक्ल लेखन में उपनाम `सचिन` का उपयोग करते हैंl ७ जनवरी १९७६ को लौरिया(पश्चिमी चम्पारण), बिहार में जन्मे श्री शुक्ल का निवास वर्तमान में दक्षिणी दिल्ली में है,जबकि स्थाई पता जिला पश्चिमी चम्पारण हैlआपकी शैक्षणिक योग्यता-स्नातकोत्तर(संस्कृत) हैlइनका कार्यक्षेत्र-निजी क्षेत्र में नौकरी (दिल्ली)हैlसामाजिक गतिविधि के अंतर्गत किसी भी प्रकार की सामाजिक कुप्रथा(दहेज,भ्रूण हत्या आदि)का कट्टर विरोध करते हुए समाजसेवा को जीवन का प्रथम एवं एकमेव लक्ष्य बनाकर सक्रिय हैंlइनकी लेखन विधा-काव्य होकर सीखने का क्रम जारी है।प्रकाशन के तहत कुसुमलता साहित्य संग्रह में स्थान मिला है तो अन्य अखबारों आदि में रचना प्रकाशन जारी है। श्री शुक्ल को सर्वश्रेष्ठ रचना के परिपेक्ष्य में प्रशस्ति-पत्र का सम्मान मिला है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मन के भावों को जनमानस तक पहुंचाना और सामाजिक कुरीतियों को इंगित कर रचना के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाना है। प्रेरणा पुंज-फेसबुक पर मिले राजेश पाण्डेय हैं। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा का ज्ञान रखने वाले सचिन की रुचि पुराने गाने सुनना,क्रिकेट मैच देखने-सुनने में है।

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