सामान्य लड़की की असामान्य कहानी…राज़ी

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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इस फिल्म में कलाकार-आलिया भट्ट,विकी कौशल,रजित कपूर, करण एहलावत और शिशिर शर्मा हैं। निर्देशक मेघना गुलज़ार है तो संगीत  शंकर,एहसान एवं लॉय ने दिया है।
फ़िल्म निर्देशिका मेघना गुलज़ार (बोस्की) पर फ़िल्म के पहले एक चर्चा ज़रूरी है। यह राखी और फ़िल्मकार-गीतकार गुलज़ार साहब की इकलौती पुत्री है। अपने पिता की फ़िल्म ‘माचिस’ और ‘हू तू हू’ में सहायक निर्देशक काम कर चुकी है। न्यूयार्क से फ़िल्म का अध्ययन किया। संजय गुप्ता की ‘दस कहानियां’ में से अमृता सिंह वाली कहानी निर्देशित कर चुकी है तो २००० में फ़िल्म ‘फिलहाल’ भी  निर्देशित कर चुकी है। २००७ में ‘जस्ट मैरिड’ के अलावा दूरदर्शन के लिए एक दस्तावेजी फ़िल्म ‘पूरनमासी’ भी बना चुकी है। ‘तलवार’ फ़िल्म से वह स्वयं को सिद्ध कर चुकी है। काम के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं,लेकिन इस उद्योग में अधिक या कम काम सफलता या रचनात्मकता का पैमाना नहीं रहा है। मेघना बेहद संजीदगी की भट्टी से तप के निकली हुई निर्देशिका है,इसका उदाहरण हम फ़िल्म ‘तलवार’ में  देख चुके हैं।
अब कहानी के पहले फ़िल्म के संदेश पर बात कर लेते हैं। जंग में केवल जीत केवल जंग की होती है। हार होती है इंसानियत की, रिश्तों की,परिवारों की,इंसानों की।
हिन्दुस्तान में हिदायत खान (रजित कपूर) देश के लिए पाकिस्तान की जासूसी करते हैं,लेकिन अब उनको बीमारी हो गई है जिसके चलते वह देश की खिदमत करने में असमर्थ होते जा रहे हैं तो वह अपनी बेटी सहमत (आलिया भट्ट)को भारत के आंख, कान बनाकर पाकिस्तान भेजना चाहते हैं। वह पाकिस्तान में उनके दोस्त परवेज सय्यद (शिशिर शर्मा) जो वहां की सेना में बड़े ओहदे पर हैं,के बेटे इकबाल(विकी कौशल) से(जो फ़ौज में ही है)सहमत की शादी कर देते हैं।  पाकिस्तान में जासूसी के लिए सहमत को प्रशिक्षण दिया जाता है,जो बशीर एहमद (जयदीप एहलावत) देते हैं। फिर सहमत ब्याह के पाकिस्तान जाती है,और शुरू होती है जासूसी पाकिस्तान की। एक आम इंसान जो खून को देखकर खौफ खा जाए और उस शख्स को खून ही करना पड़े तो उसकी मानसिक स्थिति कैसी होगी, यह मेघना ने बड़ी सुंदरता से पिरोया है। इस काम में सहमत अपना सब-कुछ खो देती है और ज़िंदगी की एक किरण लेकर दुनिया से खुद को दूर कर लेती है।
फिल्म की पटकथा शानदार है।
अदाकारों में आलिया ने एक बार फिर खुद को साबित किया है। साथ ही पूरी फिल्म को संजीदगी से लेकर निकल गई है। उसकी अभिनय क्षमता अद्वितीय है। रजित कपूर,शिशिर शर्मा, विकी कौशल यहां तक कि फ़िल्म का हर पात्र सटीक और उपयुक्त था।
फ़िल्म हरिंदर सिंह के उपन्यास    ‘कॉलिंग सहमत’ पर आधारित थी। मेघना तथा आलिया ने बड़ी सहजता से खुद को सिद्ध किया है।
संगीत शंकर-एहसान-लॉय का है, जिसमें गाने ‘राजी,दिलबरो,के वेतन’ कान से होते हुए दिल तक पहुंचते हैं।
परिचय : इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl 

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