सावन की बहार

सुशीला रोहिला
सोनीपत(हरियाणा)
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सावन आया झूम-झूम के,मेघा बरसे ओह! मेघा बरसे,
बागों में झूले पड़ गए,बिन बादल बदरिया बरसे।
चातक का जियरा तड़पे,बूँद-बूँद की बाट निहारे,
तड़प-तड़प विरह की अग्नि बरसेll

वनों में मस्ती का समन्दर,जंगल चरा-चर गुंजन,
महके प्रकृति का दामन,मोर नृत्य मनभावनl
दामिनी की चमक प्रकाशित कर रहा गगन,
झूम रहा है सारा चमन,महके सारा भवनll

तीज का पर्व प्रिय-प्रिया का मिलन,
बेटी का गृह आगमन,ससुर लाए शगन।
बागों में हुआ सखियों से मिलन,
प्रियतम का मनन,लुभाए रे दिल का मिलनll

शिव का डमरू अनहद का रहस्य खोले,
सत हरि भजन जगत सब सपना बोले।
गौरा अमृत का पान अब स्वयं कर ले,
जगत के जंजाल से अब बच लेll

 सावन गुरु पुर्णिमा को लाए,पूर्ण रूप गुरु दर्शाए,
जीव ब्रम्ह का भेद बतलाए,नारायण चेतन में समाए।
तत्व का भेद तत्वदर्शी बतलाए,परब्रम्ह समझ में आए,
गुरु का रूप प्रकाश दिन राती,तिमिर ठहर न पाएll

 सावन में सरसों का तेल पौष्टिकता को लाए,
जितने चाहे पकवान बनाए,जिह्वा का स्वाद बढ़ाए।
गंगा माँ का मान बढ़ा,गंगाजल कावड़ में भर लाए,
भारत का हर कोना झूम-झूम मल्हार सावन को गाएll
 परिचय-सुशीला रोहिला का साहित्यिक उपनाम कवियित्री सुशीला रोहिला हैl इनकी जन्म तारीख ३ मार्च १९७० और जन्म स्थान चुलकाना ग्राम हैl वर्तमान में आपका निवास सोनीपत(हरियाणा)में है। यही स्थाई पता भी है। हरियाणा राज्य की श्रीमती रोहिला ने हिन्दी में स्नातकोत्तर सहित प्रभाकर हिन्दी,बी.ए., कम्प्यूटर कोर्स,हिन्दी-अंंग्रेजी टंकण की भी शिक्षा ली हैl कार्यक्षेत्र में आप निजी विद्यालय में अध्यापिका(हिन्दी)हैंl सामाजिक गतिविधि के तहत शिक्षा और समाज सुधार में योगदान करती हैंl आपकी लेखन विधा-कहानी तथा कविता हैl शिक्षा की बोली और स्वच्छता पर आपकी किताब की तैयारी चल रही हैl इधर कई पत्र-पत्रिका में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका हैl विशेष उपलब्धि-अच्छी साहित्यकार तथा शिक्षक की पहचान मिलना है। सुशीला रोहिला की लेखनी का उद्देश्य-शिक्षा, राजनीति, विश्व को आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार मुक्त करना है,साथ ही जनजागरण,नारी सम्मान,भ्रूण हत्या का निवारण,हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनाना और भारत को विश्वगुरु बनाने में योगदान प्रदान करना है। लेखन में प्रेरणा पुंज-हिन्दी है l आपकी विशेषज्ञता-हिन्दी लेखन एवं वाचन में हैl

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