साहित्यकार बैरागी जी की यादों का गुलदस्ता

राजेश पुरोहित
झालावाड़(राजस्थान)
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  हिंदी के साहित्यकार,कवि बालकवि बैरागी का जन्म १० फरवरी १९३१ को मन्दसौर जिले की मनासा तहसील के रामपुर गाँव में हुआ था। बैरागी जी ने विक्रम विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर किया।
उन्हें कई पुरस्कारों से संम्मानित भी किया गया। उनकी प्रमुख रचनाओं में गौरव गीत,दरद दीवानी,दो टूक,भावी रक्षक देश के आदि मानी जाती हैं।
  बाल कवि बैरागी जी मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। प्रदेश की सरकार में मंत्री भी रहे। मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें कवि प्रदीप सम्मान से नवाजा।
 बैरागी जी मृदुभाषी व समय व्यक्तित्व के धनी थे,और उन्होंने अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। यह ‘सूर्य उवाच है करोड़ों सूर्य और दीपनिष्ठा को जगाओ’ जैसी अनेक कविताएँ रचकर लोगों के ह्रदय में बस गए थे। मालवी व हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने खूब लेखन किया। बैरागी जी संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपनी कविताओं से जीवन भर राष्ट्र जागरण का काम किया।
उनकी प्रतिनिधि रचनाएँ-दीवट पर दीप,झर गए पात,गन्ने मेटे भाई,जो कुटिलता से जिएंगे,अपनी गंध नहीं बेचूंगा,मेरे देश के लाल,नौजवान आओ रे,सारा देश हमारा एवं बाल कविताएँ-विश्वास,चांद में धब्बा, आकाश,खुद सागर बन जाओ, चाय बनाओ हैं,जो लोकप्रिय हुई।
१९४० में बैरागी जी सातवीं में पढ़ते थे। उनके गुरुजी भैरवलाल चतुर्वेदी थे। मनासा से २८० किलोमीटर दूर सातवीं की परीक्षा देने जाते थे। इंदौर में परीक्षा होती थी। बैरागी जी का जन्म नाम नन्दराम दास बैरागी था। ईश्वर व माता-पिता के आशीर्वाद से इनका कंठ बहुत मधुर था। ये पिताजी के साथ सारंगी पर गाते थे। बचपन में जब कक्षा चार में पढ़ते थे,तभी से कविता लिखना शुरू कर दिया था।
बैरागी जी १९४५ में कांग्रेस में सक्रिय रहे।१९६७ में विधानसभा चुनाव में इन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को हराया।१९६९ से १९७२ तक पंडित श्यामचरण शुक्ल के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रहे। १९८० में मनासा में दुबारा विधायक निर्वाचित हुए। अर्जुनसिंह जी की सरकार में मंत्री रहे। १९८४ तक लोकसभा में रहे।१९९५,९६ में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में सचिव रहे। १९९८ में मध्यप्रदेश से  राज्यसभा में गए। २९ जून २००४ तक लगातार राज्यसभा के सदस्य रहे। २००४ में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के चुनाव में आप चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष चुने गए। २००८ से ११ तक मध्यप्रदेश कांग्रेस में उपाध्यक्ष रहे। मध्यप्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति के अध्यक्ष भी रहे।
वर्तमान में बैरागी जी केन्द्रीय हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य थे।
देश के ख्यातिनाम कवि बैरागी जी का १३ मई २०१८ को मनासा में निधन होने से देश में शोक की लहर दौड़ गई। निःसंदेह देश ने एक शानदार राजनेता और श्रेष्ठ कवि-साहित्यकार खो दिया है।

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