साहित्य समाज का मार्गदर्शक

शम्भूप्रसाद भट्ट `स्नेहिल’
पौड़ी(उत्तराखंड)

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साहित्य वह अत्यंत महत्वपूर्ण व आवश्यक तत्व है,जो समाज की दशा व दिशा सुनिर्धारित करने में अपनी अहम् भूमिका अदा करता है। इसलिए,इसके प्रचार-प्रसार हेतु कोई भी कार्य करना समाज को एक नई दिशा प्रदान करना ही कहलाएगा।

साहित्य का वास्तविक आशय भी यही है कि,समाज के समस्त जन साथ-साथ रहकर सम्पूर्ण समाज का हित अर्थात् कल्याण करें। यह जीवन में स्वार्थ से ऊपर उठकर परमार्थ की शिक्षा प्रदान करता है। समाज हित की बात करता है। साहित्य का उद्गम मन से होता है,अतः यह अन्तर्मन के गम्भीरतम विचारों का अदभुत व अद्वितीय उपहार है।

वर्तमान में भले ही कई बार यह भी दृष्टिगत होता है कि,साहित्य के नाम पर कतिपय तथाकथित साहित्यकारों द्वारा इस प्रकार के विचार भी पाठकों तक पहुँचाए या परोसे जाते हैं जो समाज में विकृति फैलाने का ही काम करते हैं,लेकिन इससे साहित्य की वास्तविक महत्ता को नजरअंदाज तो नहीं किया जा सकता है। वह इसी प्रकार से है कि,सद्पुरूषों के पास की सम्पन्नता देर-सबेर जरूरतमंद के काम आ ही जाती है,जबकि अधर्मी व्यक्तियों की सम्पन्नता समाज को प्रताड़ित करने में ही व्यय होती है। ऐसे ही साहित्य भी अपना सद् व असद् प्रभाव समाज पर प्रवाहित करता ही है।

समाज में व्याप्त ऐसी व्यवस्थाओं से समाज को सचेत करने का काम साहित्य ही करता है,जो समाज के लिए अहितकारक हो, इनके निस्तारण की राह प्रशस्त करता है। समाज के सभी जनों को एक सूत्र में पिरोने में सच्चे मार्गदर्शक का काम भी करता है। इतिहास साक्षी है कि,जब-जब भी देश में राष्ट्रभक्ति के जागरण की आवश्यकता हुई तो साहित्य ने अपना दायित्व बखूबी निभाया।

आज के दौर में जिस प्रकार से दृश्य चित्रण का वातावरण ही अधिकतर प्रभावी होने से पठन-पाठन का प्रभाव बहुत कम हो रहा है,इससे अच्छा प्रभावकारी व ज्ञानप्रद साहित्य विलुप्ति की कगार पर पहुँचने की सम्भावना प्रबल हो रही हैl इससे भविष्य में विकृति ही व्याप्त होगी,इसलिए आज आवश्यकता है,ऐसे विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन कर विशेषतः युवाओं को स्वाध्याय से होने वाले लाभ से परिचित कराने का कार्य किया जाना जाए,ताकि समाज को एक नई दिशा मिलेl इससे सृजनात्मकता के प्रभाव से सामाजिक विकृति को प्रभावी होने से रोका जा सकेगा।

परिचय-शम्भूप्रसाद भट्ट का साहित्यिक उपनाम-स्नेहिल हैl जन्मतिथि-२१आषाढ़ विक्रम संवत २०१८(४ जुलाई १९६१) और जन्मस्थान ग्राम भट्टवाड़ी (रूद्रप्रयाग,उत्तराखण्ड) हैl आप वर्तमान में उफल्डा(श्रीनगर पौड़ी,उत्तराखंड) में रहते हैं,जबकि स्थाई निवास ग्राम-पोस्ट-भट्टवाड़ी (जिला रूद्रप्रयाग) हैl उत्तराखण्ड राज्य से नाता रखने वाले श्री भट्ट कला एवं विधि विषय में स्नातक होने के सात ही प्रशिक्षु कर्मकाण्ड ज्योतिषी हैंl आप राजकीय सेवा से स्वैच्छिक रुप से सेवानिवृत्त हैंl  सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत विविध साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं में प्रतिभागिता-सहयोगात्मक मदद करते हैंl शम्भूप्रसाद भट्ट की लेखन विधा-पद्यात्मकता तथा गद्यात्मकता के तहत सम-सामयिक लेख,समीक्षात्मक एवं शोध आलेख आदि हैl ३ पुस्तकें प्रकाशित होने के साथ ही तथा देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हुआ हैl आपको साहित्यिक-सामाजिक कार्योंं हेतु स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ४० से अधिक उत्कृष्टतम सम्मान-पुरस्कार प्राप्त हुए हैंl साथ ही अलंकरणों से भी विभूषित हो चुके हैंl इनकी दृष्टि में विशेष उपलब्धि-सन्तुष्टिपूर्ण जीवन और साहित्यिक पहचान ही हैl श्री भट्ट की लेखनी का उद्देश्य-धर्म एवं आध्यात्म,वन एवं पर्यावरणीय,सम-सामयिक व्यवस्था तथा राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ ही मातृभाषा हिंदी का बेहतर प्रचार-प्रसार करना हैl

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