सिलसिला

ओमप्रकाश बिन्जवे `राजसागर`
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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के नींद नहीं आती रातों को रतजगा कायम है।
हर लम्हां तेरी ही यादों का सिलसिला कायम है।

आँखों में नहीं हैं ख़्वाब फिरते हैं आजाद परिंदों जैसे,
वो कहां ठहरें के आंखों में तेरा चेहरा कायम है।

कहने को यूँ तो फिर हम चल रहे हैं साथ-साथ,
मगर अभी भी दरमियां वही फासला कायम है।

दौरे खिजां हो या के हों बहारों के दिलकश मौसम,
हर वक्त पलकों से आँसूओं का राब्ता कायम है।

हर एक मसअले अब सुलझ ही जाएंगे सागर,
जब तलक कि सरों पे माँ-बाप का साया कायम है॥

परिचय-ओमप्रकाश बिन्जवे का साहित्यिक नाम `राजसागर` हैl आप पश्चिम मध्य रेल में स्टेशन प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैंl जन्म स्थल-ग्राम पाढर जिला बैतूल (म.प्र.)हैl शिक्षा-एम.ए.(अर्थशास्त्र)हैl इनका वर्तमान निवास होशंगाबाद रोड (भोपाल,मध्यप्रदेश) पर हैl आपकी रूचि-लेखन,फिल्म निर्माण, पर्यटन तथा संगीत में हैl आपका लक्ष्य-फिल्म निर्माण,संगीत स्टूडियो और पुस्तक प्रकाशन का हैl श्री बिन्जवे की उपलब्धि एक पत्रिका में सम्पादक (भोपाल) सहित पत्रकारिता करना एवं प्रकाशित पुस्तकें-खिड़कियाँ बन्द है(ग़ज़ल संग्रह),चलती का नाम गाड़ी (उपन्यास) और बेशरमाई तेरा आसरा(व्यंग्य संग्रह) हैl हिंदी को आगे बढ़ाना ही आपकी लेखनी का उद्देश्य है। कार्यालय में हिंदी में कार्य करने के लिए आपको सम्मानित किया जा चुका है। बहुआयामी प्रतिभा के धनी श्री बिन्जवे की रचनाएं कई पत्रों में छपी हैंl आपको काव्य क्षेत्र में आपको अखबारों सहित केन्द्रीय संस्कृति मंत्री के कर कमलों से `काव्य रश्मि`सम्मान(दिल्ली) से नवाजा जा चुका है। साथ ही संकलन का विमोचन भी मंत्री द्वारा किया गया थाl 

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