सुख-सुविधा से ज्यादा अपनापन जरूरी

डाॅ.देवेन्द्र जोशी 
उज्जैन(मध्यप्रदेश)

********************************************************************

आज हम एक ऐसी दुनिया में  विचरण कर रहे हैं  जहाँ लोग सिर्फ भाग रहे हैं। यह भागम-भाग  भौतिकवादी सुखों को पाने की है। हम सभी इस दौड़  का हिस्सा इसलिए हैं कि अपने बच्चों को बेहतर सुख-सुविधाएँ और भविष्य दे सकें,उनका जीवन आसान और आरामदायक बना सकें,लेकिन इस भाग-दौड़ के बीच हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि बच्चों  को हमारी सुख-सुविधा और धन-ऐश्वर्य से ज्यादा  हमारे प्यार और अपनेपन की जरूरत है। अतः,जब भी माता-पिता को समय मिले,उन्हें अपने बच्चे के साथ अधिकाधिक समय व्यतीत करना चाहिए। इससे बच्चों का एकाकीपन दूर होगा।
वो दिन लद गए,जब कहा जाता था कि पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब और खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे नवाब।आज जमाना बदल चुका है। अब न अकेले खेलकूद  से काम चलता है और न ही समय के साथ-साथ बहुत कुछ बदल गया है। पहले कहा जाता था कि ‘छड़ी  पड़े छम-छम,विद्या आए धम-धम।’ आज की शिक्षा  व्यवस्था में इस तरह की कहावतों के लिए कोई स्थान नहीं है,क्योंकि बच्चों के साथ मारपीट और अमानवीय यातना पर अब पूरी तरह रोक है। समय के साथ आए बदलाव को अभिभावकों को भी समझना होगा।बच्चों की रूचि और शारीरिक विकास की जरूरतों का भी ध्यान रखना होगा। उन्हें किताबी कीड़ा बनाने के दबाव में कहीं हम उनसे उनकी सेहत और जीने की आजादी न छीन लें। इस बात का हर क्षण ध्यान रखा जाना चाहिए। खेलकूद,स्वास्थ्य और आरोग्य की दृष्टि  से तो जरूरी है ही,लेकिन आज का युग तो इसमें भविष्य की अपार संभावनाओं के द्वार भी खोलता है।ऐसे में बच्चा यदि खेलकूद में भविष्य बनाना चाहता है तो उसे पुरानी कहावतों की परिपाटी पर चलते हुए हतोत्साहित करने के बजाय उसकी बात पर गंभीर  और सकारात्मक तरीके  से विचार किया जाना चाहिए। शिक्षा के साथ खेलकूद का जहाँ तक सवाल  है, आज के बच्चों पर सर्वोच्च अंक लाने का मानसिक और बस्ते के बोझ का शारीरिक दबाव इतना अधिक  है कि,शिक्षा और खेलकूद आधारित मनोरंजन की उन्हें पहले की तुलना में आज कहीं अधिक जरूरत  है।
परिचय-डाॅ.देवेन्द्र जोशी का निवास मध्यप्रदेश के उज्जैन में हैl जन्म तारीख १९ नवम्बर १९६२ और जन्म स्थान-उज्जैन (मध्यप्रदेश)है। वर्तमान में उज्जैन में ही बसे हुए हैं। इनकी पूर्ण शिक्षा-एम.ए.और पी-एच.डी. है। कार्यक्षेत्र-पत्रकारिता होकर एक अखबार के प्रकाशक-प्रधान सम्पादक (उज्जैन)हैं। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप एक महाविद्यालय-एक शाला सहित दैनिक अखबार के संस्थापक होकर शिक्षा,साहित्य एवं पत्रकारिता को समर्पित हैं। पढ़ाई छोड़ चुकी १००० से अधिक छात्राओं को कक्षा १२ वीं उत्तीर्ण करवाई है। साथ ही नई पीढ़ी में भाषा और वक्तृत्व संस्कार जागृत करने के उद्देश्य से गत ३५ वर्षों में १५०० से अधिक विद्यार्थियों को वक्तृत्व और काव्य लेखन का प्रशिक्षण जारी है। डॉ.जोशी की लेखन विधा-मंचीय कविता लेखन के साथ ही हिन्दी गद्य और पद्य मेंं चार दशक से साधिकार लेखन है। डाॅ.शिवमंगल सिंह सुमन,श्रीकृष्ण सरल,हरीश निगम आदि के साथ अनेक मंचों पर काव्य पाठ किया है तो प्रभाष जोशी,कमलेश्वर जी,अटल बिहारी,अमजद अली खाँ,मदर टैरेसा आदि से साक्षात्कार कर चुके हैं। पत्रिकाओं सहित देश- प्रदेश के प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्रों में समसामयिक विषयों पर आपके द्वारा सतत लेखन जारी है। `कड़वा सच`( कविता संग्रह), `आशीर्वचन`, आखिर क्यों(कविता संग्रह) सहित `साक्षरता:एक जरूरत(अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता वर्ष में प्रकाशित शोध ग्रन्थ) और `रंग रंगीलो मालवो` (मालवी कविता संग्रह) आदि आपके नाम हैl आपको प्राप्त सम्मान में प्रमुख रुप से अखिल भारतीय लोकभाषा कवि सम्मान, मध्यप्रदेश लेखक संघ सम्मान,केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड सम्मान,ठाकुर शिव प्रतापसिंह पत्रकारिता सम्मान,वाग्देवी पुरस्कार,कलमवीर सम्मान,साहित्य कलश अलंकरण और देवी अहिल्या सम्मान सहित तीस से अधिक सम्मान- पुरस्कार हैं। डॉ.जोशी की लेखनी का उद्देश्य-सोशल मीडिया को रचनात्मक बनाने के साथ ही समाज में मूल्यों की स्थापना और लेखन के प्रति नई पीढ़ी का रुझान बनाए रखने के उद्देश्य से जीवन लेखन,पत्रकारिता और शिक्षण को समर्पण है। विशेष उपलब्धि महाविद्यालय शिक्षण के दौरान राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद स्पर्धा में सतत ३ वर्ष तक विक्रम विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व और पुरस्कार प्राप्ति हैl आपके लिए प्रेरणा पुंज-माता स्व.श्रीमती उर्मिला जोशी,पिता स्व.भालचन्द्र जोशी सहित डाॅ.शिवमंगल सिंह सुमन,श्रीकृष्ण सरल,डाॅ.हरीश प्रधान हैं। आपकी विशेषज्ञता समसामयिक विषय पर गद्य एवं पद्य में तत्काल मौलिक विषय पर लेखन के साथ ही किसी भी विषय पर धारा प्रवाह ओजस्वी संभाषण है। लोकप्रिय हिन्दी लेखन में आपकी रूचि है।

Hits: 12

आपकी प्रतिक्रिया दें.