सुबह

डॉ.नीलम कौर
उदयपुर (राजस्थान)
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भीगी-सी हवा ने प्राची द्वार पर दस्तक दी,
अलसाई भोर ने उनींदी
आँखें खोल किवाड़ खोले,
धीमे से बालारुण ने
मंद-मुस्कान से भीगी बयार का स्वागत कर,
रवि ने किरण पाश यूं खोले
ज्यूं डिंब तोड़ नन्हां पंछी,
पंख फड़फ़ड़ा उड़ने को
आतुर होता हो।
क्षितिज पट पर सिंदूर यूं छिटक गया,     ज्यूं किसी
गोरी को सुहाग सिंदूर,
देवी के दरबार से मिला।
नन्हें पंछियों के स्वर
मंगल- गान से गूंजने लगे,
अंधेरे ने सिमट उजाले को राह दी।
चारों ओर सुहानी भोर का आलम था,
पत्ता-पत्ता,जर्रा- जर्रा
ओस में नहा तरोताजा
हुआ॥
परिचय – डॉ.नीलम कौर राजस्थान राज्य के उदयपुर में रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। आपका उपनाम ‘नील’ है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। आपका निवास स्थल अजमेर स्थित जौंस गंज है।  सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। अन्य सामाजिक संस्थाओं में भी जुड़ाव व सदस्यता है। आपकी विधा-अतुकांत कविता,अकविता,आशुकाव्य और उन्मुक्त आदि है। आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना और भावनाओं के ज्वार को शब्दों में प्रवाह करना ही लिखने क उद्देश्य है।

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