सोचने को मजबूर करती फिल्म ‘सच्ची सहायता शनि साधक की’ 

विनोद वर्मा `आज़ाद`
देपालपुर (मध्य प्रदेश) 

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सुरेश वर्मा बंजरिया की लघु फ़िल्म ‘सच्ची सहायता शनि साधक की’ मात्र ८ मिनट की होकर ८० मिनट का मनोरंजन नहीं,बल्कि सोचने को मजबूर करने वाली सिद्ध हुई है।
फ़िल्म की शुरुआत सामान्य तरीके से हुई। दो मजदूर एक मकान पर ‘दानी-दस्सी’ का कार्य कर रहे थे। उनमें से एक दिव्यांग अपने कटे हाथ का सहारा लेते हुए कार्य कर रहा था। प्याज और रोटी से पेट भरने वाले दोनों मजदूरों को संध्या समय निर्माणाधीन मकान के मालिक द्वारा मजदूरी में एक मजदूर को ४०० ₹ और दिव्यांग को ३०० ₹ दिए जाते हैं। दिव्यांग कटे हाथ की तरफ देखते हुए ३०० ₹ मिलने पर पश्चाताप वाला चेहरा बनाता है तो मालिक कहता है-‘तू काम भी तो कम करता है।’

    एक दिन उक्त इलाके से शनि साधक महामंडलेश्वर श्री दादू जी महाराज और उनके अनुयायी कार से गुजर रहे होते हैं,तब उनके एक भक्त की निगाह उक्त दिव्यांग पर पड़ती है। तब सब रुककर दिव्यांग को कुछ नकदी राशि देने का प्रयास करते हैं।
दिव्यांग ने यह पहल अस्वीकार करते हुए कहा-‘नहीं मैं ऐसी किसी भी प्रकार की सहायता नही लूंगा। मैं अपनी मेहनत की कमाई से ही पेट भरूँगा।’ तब सन्त श्री दादूजी महाराज और अनुयायी उसे अपने साथ ले जाते हैं एवं नकली हाथ बनवा देते हैं। वह दिव्यांग बहुत खुश होता है और दोगुने जोश के साथ अपने काम करने लगता है।
संध्या समय पुनः मालिक आता है और एक को ४०० ₹ और दिव्यांग को पुनः ३०० ₹ देता है। तब दिव्यांग के चेहरे पर मायूसी के भाव झलकते हैं। ऐसा देखकर उसे १०० ₹ और देकर कहता है,-‘तू भी अब काम ज्यादा करने लगा है।’ यह सुनकर दिव्यांग की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
फ़िल्म का आरम्भ,मध्यान्तर और अंत सामान्य जरूर दिखाया गया है,लेकिन एक गम्भीर सन्देश इस फ़िल्म के माध्यम से निर्माता सुरेश वर्मा ने दिया है।
फ़िल्म में कोई भी पेशेवर कलाकार नहीं है,केवल फ़िल्म निर्माता-निर्देशक सुरेश वर्मा के अलावा। इसमें श्री दादूजी महाराज के आश्रम में सेवा देने वाले शनि भक्त थे,जिन्होंने कभी कैमरे का सामना ही नहीं किया। छायाकार भी नया, सम्पादक भी नया और फ़िल्म ऐसी बन गई,जिसको देखकर लगता है इक्का-दुक्का को छोड़कर मंजे हुए कलाकार थे। फिल्म में कोई छ्द्म(डमी) काम नहीं किया गया है। सीधे-सीधे शब्दों में लाग-लपेट नहीं होकर फ़िल्म शानदार है। पूरी फिल्म की यूनिट नई होने के कारण  हल्की-फुल्की कमी को नज़र अंदाज़ किया जा सकता है। फ़िल्म के प्रीमियर शो में दोनों शो भरे रहे। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव  कैलाश विजयवर्गीय के मुख्य आतिथ्य और वरिष्ठ पत्रकार कृष्णकुमार अष्ठाना की अध्यक्षता में हुए शो में दर्शकों ने खूब तालियां बजाई। इस फ़िल्म की सभी ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
फिल्म में महामंडलेश्वर श्रीदादूजी महाराज के चेहरे का तेज और फ़िल्म की सफलता की खुशी अलग ही झलक रही थी। सुरेश वर्मा के बारे में खास बात कि इन्होंने  रजक समाज के सन्त गाडगे महाराज सहित अन्य विषयों पर भी फिल्में बनाई हैं। श्री शनिदेव पर एक गाने का निर्माण किया था,जिसका अलग अंदाज में फिल्मांकन और गायन हुआ था। टी-सीरिज़ ने इसके सारे अधिकार लेकर गाने को उठा लिया था। उक्त निर्माता द्वारा बड़े स्तर पर तो नहीं,पर स्तरीय फ़िल्म निर्माण किया जा रहा है। उक्त फ़िल्म यू ट्यूब पर उपलब्ध है,जिसे एक बार अवश्य देखें,बार-बार देखने की इच्छा होगी।
परिचय-विनोद वर्मा का साहित्यिक उपनाम-आज़ाद है। जन्मतिथि १ जून १९६२ एवं जन्म स्थान देपालपुर (जिला इंदौर,म.प्र.)है। वर्तमान में देपालपुर में ही बसे हुए हैं। श्री वर्मा ने दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर सहित हिंदी साहित्य में भी स्नातकोत्तर,एल.एल.बी.,बी.टी.,वैद्य विशारद की शिक्षा प्राप्त की है,तथा फिलहाल पी.एच-डी के शोधार्थी हैं। आप देपालपुर में सरकारी विद्यालय में सहायक शिक्षक के कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत साहित्यिक,सांस्कृतिक क्रीड़ा गतिविधियों के साथ समाज सेवा, स्वच्छता रैली,जल बचाओ अभियान और लोक संस्कृति सम्बंधित गतिविधियां करते हैं तो गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षण सामग्री भेंट,निःशुल्क होम्योपैथी दवाई वितरण,वृक्षारोपण,बच्चों को विद्यालय प्रवेश कराना,गरीब बच्चों को कपड़ा वितरण,धार्मिक कार्यक्रमों में निःशुल्क छायांकन,बाहर से आए लोगों की अप्रत्यक्ष मदद,महिला भजन मण्डली के लिए भोजन आदि की व्यवस्था में भी सक्रिय रहते हैं। श्री वर्मा की लेखन विधा -कहानी,लेख,कविताएं है। कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचित कहानी,लेख ,साक्षात्कार,पत्र सम्पादक के नाम, संस्मरण तथा छायाचित्र प्रकाशित हो चुके हैं। लम्बे समय से कलम चला रहे विनोद वर्मा को द.साहित्य अकादमी(नई दिल्ली)द्वारा साहित्य लेखन-समाजसेवा पर आम्बेडकर अवार्ड सहित राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा राज्य स्तरीय आचार्य सम्मान (५००० ₹ और प्रशस्ति-पत्र), जिला कलेक्टर इंदौर द्वारा सम्मान,जिला पंचायत इंदौर द्वारा सम्मान,जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा सम्मान,भारत स्काउट गाइड जिला संघ इंदौर द्वारा अनेक बार सम्मान तथा साक्षरता अभियान के तहत नाट्य स्पर्धा में प्रथम आने पर पंचायत मंत्री द्वारा १००० ₹ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही पत्रिका एक्सीलेंस अवार्ड से भी सम्मानित हुए हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-एक संस्था के जरिए हिंदी भाषा विकास पर गोष्ठियां करना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा के विकास के लिए सतत सक्रिय रहना है।

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