सोच-समझकर

सुनील जैन `राही`
पालम गांव(नई दिल्ली)

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शर्मा जी का मोहल्ला सबसे साफ-सुथरा माना जाता। सभी पढ़े लिखे,सभी सोच-समझकर कार्य करते। चुनाव में `मत` भी सोच-समझकर किया। उनका नेता भी सोच-समझकर विकास कार्य करवाता। नेता की सोच,जो मत दे,जिसके मत की गारंटी,उस क्षेत्र के विकास की गारंटी। परिसीमन आदेश आया। नये आदेश के अनुसार नेता बदला,क्षेत्र बदला,कार्यकर्ता बदले। ये काम सब सोच समझकर नहीं हुआ,ऐसा जनता का मानना था,लेकिन यह बड़े ही सोच-समझकर किया गया कार्य यह पार्टी का मानना था।  
सभी काम सोच-समझकर ही किए जाते हैं। गंदे पानी की निकासी के लिए सोच-समझकर सभी ने पैसे इकटठे किए। सोच-समझकर सीवर लाईन डलवाई। नयी कालोनी है,कुछ काम विधायक निधि के अलावा अपने पैसे से भी कराने पड़ते हैं। सभी काम सोच-समझकर ही करना चाहिए,ऐसा शर्मा जी का मानना था। 
शर्मा जी का फोन अचानक नहीं,सोच-समझकर बंद हुआ। उन्होंने फोन को सोच-समझकर बंद नहीं किया। उन्होंने जरूरी बैठक की वजह से फोन बंद किया। जैसे देश में चुनाव को देखकर सोच-समझकर बंद किया जाता है। प्रिया प्रकाश ने भी कुछ सोच समझकर ही एक आँख बंद की। संसद में गले मिलने की घटना अचानक नहीं हुई। हाँ, आँख सोच-समझकर बंद की गई। प्रिया प्रकाश को भी पता नहीं था कि,इस बंद आँख के क्या विपरीत होंगे। वह किसी से गले नहीं मिली,लेकिन गले मिलने से ज्यादा खतरनाक परिणाम आए। संसद भी अछूती नहीं रही,उसकी बंद आँख के प्रभाव से। गले मिलने की वारदात और आँख बंद होने की घटना जब एकसाथ हो जाए,इसके क्‍या मायने होंगे। बात गले मिलने की हो,आँख बंद करने की हो या फिर व्यभिचार को बढ़ावा देने की बात हो,सभी काम सोच- समझकर किए जाते।
खैर शर्मा जी ने सोच-समझकर न तो आँख बंद की और ना ही नेता जी के गले मिले,लेकिन नेता जी मुहल्ले वालों के गले पड़ गए। शर्मा जी कार्यालय सोच आफिस नहीं जाते थे। वो तो उन्‍हें रोज की तरह जाना ही था,  लेकिन चुनाव सोच-समझकर इस साल आने वाले हैं। यह सोची-समझी चाल है। इसी सोची-समझी चाल के तहत नेता जी ने मुहल्‍ले में सोच-समझकर कदम रखा। उनके साथ सरकारी महकमा था। मजदूर थे,क्रेन थी,उन्‍हें शक था कि इस मुहल्‍ले में सीवर नहीं पड़ी ? ऐसा सोच-समझकर उन्‍हें समझाया गया था।  
वर्मा जी ने नेताजी को बताया-यह सीवर हमने अपने पैसे,श्रम और मजदूरों से करवाई है। इतना सुनना था कि नेता जी बिफर गए। वाह सभी काम आप ही करवाएंगे तो हम क्‍या करेंगे ? वैसे भी हम काम कम ही करते हैं। और आखिरकार सीवर के लिए नई खुदाई शुरू हुई और सीवर पर,सीवर डालने के लिए मशीनों और सरकारी मशीनरी का उपयोग हुआ। 
शाम तक मुहल्‍ले की सड़क पर बड़े-बड़े फोड़े निकल आए। न गाड़ी आ सकती और ना ही बाइक। बात यहीं तक रहती तो ठीक था। वर्मा जी ने जिरह की थी,इसलिए उनके घर के पास लगे बिजली के खम्‍बे को नापा गया। वह जमीन से पांच मिलीमीटर तिरछा था। उसे भी खोदकर निकाल दिया गया। अब कम से कम चार-पांच दिन तक बिजली और पानी नहीं आएगा। 
सभी सोच रहे थे। यह अनजाने में हुआ या सोच-समझकर। शर्मा जी ने सोच-समझकर दूसरे दिन विधायक महोदय का स्‍वागत समारोह का आयोजन फोड़ों वाली सड़क पर 
कुर्सियाँ बिछाकर किया। इस समारोह में विधायक निधि से राशि देने और कार्य करवाने के लिए धन्‍यवाद दिया गया। 
नेता जी ने बड़े ही सोच- समझकर शर्मा से कहा-शर्मा जी आप बड़े समझदार हैं,अन्‍यथा इस मुहल्‍ले का विकास तो जीवनभर नहीं हो पाता। कल तक आपकी गली ठीक हो जाएगी। कभी-कभार ऐसे ही हम लोगों को सेवा का मौका दिया करो। 
शर्मा कहते-कहते रुक गए,कुछ सोच-समझकर। वह नहीं कह पाए- यह सोचकर कि ये स्‍वागत समारोह तो हमें पहले ही करना चाहिए था। आपको हमारे मत की गारंटी हो जाती। मत की गारंटी के लिए समारोहों का आयोजन होता है, सम्‍मान होता है,कम्‍बल बांटे जाते हैं, गांधी को हाथों में रातों-रात दिया जाता है। 
मुहल्‍ले के लोग समझदार हैं। वे मत भी सोच-समझकर करेंगे। 
परिचय-आपका जन्म स्थान पाढ़म(जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद)तथा जन्म तारीख २९ सितम्बर है।सुनील जैन का उपनाम `राही` है,और हिन्दी सहित मराठी,गुजराती(कार्यसाधक ज्ञान)भाषा भी जानते हैं।बी.कॉम.की शिक्षा खरगोन(मध्यप्रदेश)से तथा एम.ए.(हिन्दी,मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया है। पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन खाते में-व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी है।आपकी कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में लेखनी का प्रकाशन होने के साथ आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हो चुका है। राही ने बाबा साहेब आम्बेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया है। मराठी के दो धारावाहिकों सहित करीब १२ आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं,रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ४५ से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वविद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैं। कुछ अखबारों में नियमित व्यंग्य लेखन करते हैं। एक व्यंग्य संग्रह अभी प्रकाशनाधीन हैl नई दिल्ली प्रदेश के निवासी श्री जैन सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रीय है| व्यंग्य प्रमुख है,जबकि बाल कहानियां और कविताएं भी लिखते हैंl आप ब्लॉग पर भी लिखते हैंl आपकी लेखनी का उद्देश्य-पीड़ा देखना,महसूस करना और व्यक्त कर देना है।

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