सोने की सीढ़ी से स्वर्ग का सफर

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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समृद्व बेटों की मां ने परपोते की खबर सुनी तो उल्लास से झुर्रियां मिटने लगी। अपने जीवनकाल में पोते के घर बेटा होना सौभाग्य से कम नहीं। सूरजपूजा के कार्यक्रम के बहाने किसी ने राय व्यक्त की-माता जी को सोने की सीढ़ी भेंट की जाए तो समाज में फर्क पड़ेगा। दो-ढाई सौ लोगों को न्यौता दिया गया। दाल-बाफले,लडडू,चटनी और झोलिया तय किया गया। बेटे समृद्व थे तो,जाहिर है आंमत्रित भी प्रभुत्व वाले थे। सूरजपूजा के बाद,मां को सोने की सीढ़ी से स्वर्ग का सफर के लिए बकायदा पंडितों का आगमन हो चुका था,तभी मझंला बेटा अन्य सामानों के साथ,मां को भी वृद्वाश्रम से ले आया। सभी ने मां को नमन किया। पंडितों ने मंत्रोच्चार कर सोने की सीढ़ी का पूजन कराने के बाद मां को सोने की सीढ़ी में हाथ लगवाकर सीढ़ी पुत्रवधू को यह कहते हुए संभला दी,कि आप इसे अपने मंदिर में रखकर पूजन करें,आप भी बड़भागी होंगी। आप
भी पड़पोते का मुंह देख सकेंगी। सभी ने भोजन का रसास्वाद किया,यह उत्सव मां भी कोने में बैठकर देखती रही। चारों बेटों को इस पुनीत कार्य के लिए प्रशंसा के फूल बरसाए जा रहे थे। बेटे भी फूले नहीं समा रहे थे,तभी मां वृद्वाश्रम के तय समयानुसार किराके आटो रिक्शे में बैठकर चल दी।

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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