स्वच्छता आदत में है,स्वच्छता त्यौहार है…

रश्मि चौधरी ‘रिशिमा’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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‘है हल्ला…है हल्ला…
ये हमारा दौर है…
ये नया इंदौर है…।’
￰बहुत ख़ुशी होती है जब कोई कहता है कि ‘आप इंदौर से हैं…स्वच्छता में पहला स्थान…वाह! क्या बात है।’
स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार दूसरे वर्ष अपना स्थान बनाए रखना कोई कम बात नहीं है और वो भी लगभग देश के चार हजार शहरों के मुकाबले। इंदौरवासियों ने इंदौर को इस मुकाम तक लाने के लिए अथक प्रयास किए हैं। आज इंदौर शहर का बच्चा-बच्चा स्वच्छता के लिए जागरूक है। क्या दुकानदार और क्या सफाईकर्मी,सबने जी-जान लगा दी अपने इंदौर को पहला स्थान दिलाने में। इसमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता जनार्दन की रही है। जब सामान लाने के लिए प्लास्टिक की थैलियां मिलना बंद हो गईं तो शुरू में बहुत परेशानी हुई,पर अब घर से ही झोला लेकर निकलते हैं लोग। वैवाहिक समारोहों में ताम्बे के लोटे से पानी पीने का चलन हो गया है…सच में बड़ा सुकून मिलता है।                      जब हमारे सफाई करने वाले साथी कचरा गाड़ी लेकर घर के सामने आते हैं तो रहवासियों को स्वयं गीला और सूखा कचरा अलग डालते देख अन्य शहरों से आए  मेहमान दाँतों तले उंगलियाँ दबा लेते हैं। बच्चे गोली-बिस्कुट आदि खाकर कचरा इधर-उधर नहीं फेंकते हैं,हर घर में दो-दो कचरे के डिब्बे हैं। हर दुकान,हर ठेले,हर चौपहिया वाहन के नियत कचरे के डिब्बे हैं। विद्यालयों में हर कक्षा का कचरा कचरे की गाड़ी में जाता है,जगह-जगह सार्वजानिक शौचालय बन गए हैं,जिनकी नियमित सफाई होती है और तो और इंदौर की प्रत्येक सड़क के हर मोड़ पर एक हरा और एक नीला कचरे का डिब्बा भी आपको दिखाई देगा।  आज ये सब इंदौर की जनता की आदत बन चुका है। स्वच्छता का ही परिणाम है कि,आज इंदौर का वातावरण शुद्ध है,यहाँ वायु स्वच्छ है और धूल के गुबार भी नहीं हैं।

   सच कहा जाए तो स्वच्छता एक मानसिकता है,एक सोच है। जब इंदौर जिले को शौचमुक्त किया जा रहा था तो,ये पाया गया कि कई  पंचायतों में शौचालय थे परन्तु लोग तैयार ही नहीं थे उनके इस्तेमाल को। लोगों की आदत में खुले में शौच जाना शुमार था। गाँव ही नहीं,शहर के बीचों-बीच कई गली- मोहल्लों में सुबह-सुबह लोगों को खुले में बैठने की आदत थी,परन्तु बहुत बड़े स्तर पर लोगों को जागरुक किया गया। गाँव-गाँव, मोहल्ले दर मोहल्ले,विद्यालयों-  महाविद्यालयों में ‘शर्मशार यात्राएं’ निकाली गईं,नुक्कड़ नाटक किए गए, घर-घर सन्देश पहुंचाने के लिए बच्चों की वानर सेना बनाई गई। महिलाओं और बुजुर्गों को इस अभियान से जोड़ा गया,     ‘जिद करो’ अभियान चलाया गया। यहाँ तक कि शौच के लिए उपयोग लाने वाले डिब्बे आदि को नष्ट करने के लिए ‘डिब्बा जलाओ’ अभियान में डिब्बों की होली जलाई गई। और ये सब कर दिखाया इंदौर के शीर्षस्थ आला अधिकारियों ने,नगर प्रतिनिधियों ने,एक-एक कर्मचारी ने,छोटे-बड़े व्यापारियों ने धर्म के ठेकेदारों ने,छोटे-छोटे बच्चों ने और इंदौर के जिम्मेदार नागरिकों ने।
इंदौर शहर का स्वच्छता के लिए ये जुनून है कि चाहे पास-पड़ोस का कोई आयोजन हो,नवरात्रि के गरबे हों, विद्यालय का सांस्कृतिक  कार्यक्रम हो या कोई वैवाहिक समारोह हो,स्वच्छता के गीत पर थिरके बिना कुछ-कुछ अधूरा-सा लगता है|
अलसुबह जब नींद खुलती है तो दूर कहीं से स्वच्छता का गीत सुनाई देता रहता है…’स्वच्छ भारत का इरादा,इरादा कर लिया हमने…’ और हर इंदौरवासी जान जाता है कि कहीं कोई है जो हमसे पहले, हमारी स्वच्छता के लिए,हमारे इंदौर की स्वच्छता के लिए,अपनी जिम्मेदारियों के लिए तैयार हो गया है।

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