स्वाइन फ्लू का टीका ही बेहतर बचाव

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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अधिकांश ज्वर ऋतु संधिकाल में होते हैं। जब एक से दूसरी ऋतु में जाने का समय होता हैं उसे रितु संधिकाल कहते हैं। इस समय जैसे जून-जुलाई के समय गर्मी ऋतु से बरसात में जाने का समय होता है,तो हमें १५ दिन पहले से गर्मी ऋतु की आदत छोड़कर बरसात ऋतु के लिए तैयार होना चाहिए। इसी प्रकार अक्टूबर-नवम्बर में बरसात ऋतु की आदत को त्याग कर ठण्ड ऋतु की दिनचर्या अपनाना चाहिए और
इसी प्रकार मार्च अप्रैल में शीत ऋतु की आदत त्याग कर गर्मी ऋतु की आदत अपनानी चाहिए। इससे शरीर में नई ऋतु को स्वीकार करने की क्षमता आने लगती है।
#स्वाइन फ्लू:क्या हैं लक्षण-
स्वाइन फ्लू-वायरल बुखार है जो वायरस से फैलता है। बारिश की वजह से स्वाइन फ्लू का वायरस और घातक हो जाता है। वातावरण में नमी बढ़ने के साथ ही यह तेजी से फैलने लगता है। यही वजह है कि मौसम बदलने के साथ एकाएक इसके मामलों की बाढ़-सी आ गई है। यदि बारिश के मौसम में आपको सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह २-३ दिन में ठीक न हो,तो एच१एन१ की जांच कराएं।
#बचाव और इलाज-
स्वाइन फ्लू उन्हीं व्यक्तियों में होता है,जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसके आसान लक्ष्य पहले से बीमार चल रहे मरीज,गर्भवती महिलाएं आदि होते हैं। अगर घर में कोई शख्स स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया हो तो, घर के बाकी लोगों को भी इससे बचने के लिए चिकित्सकीय सलाह लेकर दवा खा लेनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू से बचाव ही इसे रोकना का सबसे बड़ा उपाय है। आराम करना,खूब पानी पीना,शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर उपाय है।
शुरुआत में पैरासिटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी के बढ़ने पर एंटी-वायरल दवा टैमी फ्लू और जानामीविर (रेलेंजा)जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है,लेकिन इन दवाओं को कभी भी खुद से नहीं लेना चाहिए। वैसे सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तुलसी,गिलोए,कपूर, लहसुन,आंवला और ऐलोवियरा जैसी
आयुर्वेदिक दवाईयों का भी स्वाइन फ्लू के इलाज में बेहतर असर देखा गया है।
#ऐसे फैलता है स्वाइन फ्लू-
स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में स्थानांतरित होता है और खांसने, छींकने,थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है।
#कैसे बचें-
दूरी बनाकर रखें:किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे कम-से-कम 3 फीट की दूरी बनाए रखें। स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे भी नहीं छूना चाहिए। बहुत जरूरत पड़ने पर मास्क का
प्रयोग करके ही मरीज के पास जाना चाहिए।
गले न मिलें:अगर किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे हाथ मिलाने और गले मिलने से बचना चाहिए।
टीका लगवाएं:स्वाइन फ्लू का टीका अवश्य लगवाएं। संक्रमण से बचाव के लिए यह सबसे बढ़िया रास्ता है।
हाथ साबुन से धोएं:अपने हाथों को हमेशा साबुन और पानी से करीब २० सेकंड तक अच्छी तरह से धोएं। ये कई तरह के सामान्य संक्रमणों को रोकने
के लिए सबसे बढ़िया उपाय है।
इसके अलावा हल्दी का पाउडर को घी में सेंक कर रख ले और रात्रि में सोने से पहले गुनगुने दूध में मिलाकर या सीधे पानी से अपनी तासीर के अनुसार लें। वृहद हरिद्रा खंड एक चम्मच या आधी चम्मच नित्य पानी से लेने से भी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
इसके अलावा लाक्षणिक चिकित्सा के लिए शुरुआत में नारदीय लक्ष्मी विलास रास,गोदन्ती मिश्रण, सुदर्शन घनवटी,अमृतारिष्ट तथा कुमारीआसव दे सकते हैं। यहां विशेष ध्यान देने की बात है कि,जब भी कोई ज्वरनाशक औषधि लें,उस समय पंखा-कूलर आदि का उपयोग न करें। कारण कि जब तक शरीर से पसीना नहीं निकलेगा,तब तक बुखार कम नहीं होता है। आजकल ज्वर नाशक दवा के साथ खुली हवा या इनका उपयोग करने से यह ज्वर नहीं उतरता है।
विशेष स्थिति में विशेषज्ञ का परामर्श लिया जाना उचित है,क्योंकि बचाव ही इलाज़ है।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी() आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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