स्वाभिमान की परिभाषा हिन्दी

वीरेन्द्र कुमार साहू
गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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अपनी भाषा बोली पर जिसको नहीं होता नाज,
कैसे पा सकता है भला वह सम्मानों का ताज।
भाषा से इज्जत बनीं रहे,भाषा से मिलता मान,
निज भाषा से प्रेम करें तो आगे बढ़े समाज॥

अन्तर्मन की बातों को बेहिचक हम बोल पाते हैं,
कैसी भी हो परिस्थिति अपनी,मुख खोल पाते हैं।
सुख-दु:ख,दर्द-हर्ष,विषाद की आत्मानुभूति पर,
रोते-इतराते हँसते-खेलते बड़े प्रेम से बोल पाते हैं॥

नैनों से कही बातों की भी पूरी कर दे अभिलाषा,
आत्मसम्मान व गौरव की जो बदल दे परिभाषा।
अपनी माता की ममता-सा मिले अद्वितीय प्यार,
कह सकते हैं उसी शक्ति को हम अपनी भाषा॥

हिन्दी मेरी जिंदगी और हिन्दी मेरी आशा है,
हिन्दी से हिन्दुस्तान की पूरी होती अभिलषा है।
जननी जन्मभूमि सम माँ हिन्दी तुझको दर्जा दूँ,
हिन्दी मेरी शान और स्वाभिमान की परिभाषा है॥

परिचय-वीरेन्द्र कुमार साहू का जन्म १५ दिसम्बर १९८७ को बोड़राबांधा (राजिम) में हुआ हैl आपका वर्तमान निवास ग्राम-बोड़राबांधा,पोड़(पाण्डु का),जिला-गरियाबंद (छत्तीसगढ़)हैl यही स्थाई निवास भी हैl छत्तीसगढ़ राज्य के श्री साहू ने एम.ए.(हिन्दी) और डी.पी.ई. की शिक्षा प्राप्त की हैl आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत स्वयं के समाज में सेवी हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,कविता हैl ब्लॉग पर भी सक्रिय लेखन करते हैंl वीरेंद्र साहू की लेखनी का उद्देश्य-भावों की अभिव्यक्ति से नवजागरण करना हैl

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