सड़कों पर बिकती देशभक्ति

इलाश्री जायसवाल
नोएडा(उत्तरप्रदेश)

*******************************************************

गणतंत्र दिवस विशेष…………………..

आजकल सड़कों पर,बाजारों में रौनक छाई हुई हैl हो भी क्यों न,हमारे देश का,हमारी राष्ट्रीयता का त्योहार, गणतंत्र दिवस जो आने वाला हैl सब जगह झंडे,स्टीकर,बैनर,तिरंगे बैंड,गुब्बारे,फूल और भी न जाने कितनी ही चीजें हमारी देशभक्ति के रंग में रंगी हुईं मिल रहीं हैं,जिसको जो चाहिए अपनी पसंद और आवश्यकतानुसार ले लेl बच्चे गुब्बारे से खेले,पतंगें उड़ाएं,लड़कियां तिरंगी चूड़ियाँ पहनें,बैंड लगाएं,घर-कार्यालय के लिए स्टैण्ड आदि-आदिl इन सामानों की सूची बहुत लंबी हैl कहने का तात्पर्य है,हर आयु वर्ग के लोग अपनी पसंद और आवश्यकतानुसार तिरंगे में रंग गए हैंl आप सोच रहे होंगे कि,इतना बड़ा विवरण देने की क्या आवश्यकता है ? ये तो सभी जानते हैं,बिलकुल सही,सब जानते हैं,देशप्रेम दिखाने का मौका हो तो हम लोग पीछे नहीं रहते,चाहे वह देश की सीमा हो या देश के अंदर,पर ये तिरंगी देशभक्ति क्षणिक है…l आज तो बड़ी शान से तिरंगे में रंग जाएँगे,पर रात गई,बात गई वाली कहावत को चरितार्थ करने में भी हम लोग देर नहीं लगातेl २६ जनवरी का दिन बीतते ही सबकी देशभक्ति इधर-उधर घूमती हुई,पड़ी हुई फँसी हुई,लटकी हुई दिखाई पड़ती हैl तब क्या विचार आता है मन में ? जगह-जगह पड़े हुए झंडे,पेड़ों में फँसी हुई पतंगें,कूड़े में पड़े हुए स्टीकर,फूल कुछ अलग ही कहानी बयान कर रहे होते हैंl क्या यही असली देशभक्ति है ? आज तो अपनी शान दिखाने के लिए देश को भी स्टेटस सिंबल बना लेते हैं,पर अगले दिन का विषय कुछ और होता है,पर मेरा मन ये सब देखकर दुखी होता है…l केसरिया ,सफ़ेद और हरा भले ही तीन अलग-अलग रंग हों,पर जब भी ये साथ होते हैं तो हमें सबसे पहले अपने तिरंगे की याद दिलाते हैंl वही तिरंगा,जो हमारी आन-बान-शान हैl फिर इससे क्या फ़र्क पड़ता है कि,ये तीन रंग झंडे में है या पतंग में,चूड़ी में हैं या दुपट्टे में,बैंड में है या स्टीकर मेंl तिरंगा सिर्फ तिरंगा हैl अपनी शान दिखाने के लिए,देशभक्ति दिखाने के लिए अन्य बहुत सारे माध्यम हैंl हर लाल बत्ती पर,सड़क के किनारों पर,छोटी-छोटी दुकानें ऐसे अवसरों पर कुकुरमुत्ते की तरह उग जातीं हैंl उन्हें देश से होली,दिवाली,ईद या फिर क्रिसमस से कोई मतलब नहींl वे तो सोचते हैं कि त्योहार है,चलो थोड़ी कमाई हो जाएगी,पर राष्ट्रीय त्योहार के अवसर पर झंडे बेचना समझ से बाहर हैl हमारे देश के संविधान में झंडे के लिए विशेष नियम एवं कानून हैं जिनकी अवहेलना की जाने पर दंड का प्राविधान भी है,पर हम ऐसी स्थिति बनने ही क्यों देते हैंl झंडे जैसी अमूल्य वस्तु की बिक्री के लिए कोई आचार-संहिता नहींl बाज़ार में कोई भी उत्पाद सब्ज़ी,कपड़े,दवाई यहाँ तक कि शराब,गुटखा को बेचने के लिए भी लाइसेंस चाहिए,फिर झंडे के लिए क्यों नहींl यह आसानी से मिल जाता है,इसीलिए कानून टूटते हैंl झंडा बेचने के लिए भी लाइसेंस या विशेष अधिकार होने चाहिए,वरना हमारी देशभक्ति इसी तरह हर सड़क-चौराहों पर बिकती दिखेगीl कितने झंडे आप उठाएंगे सड़क पर से,कूड़ों के ढेर से…l

परिचय-इलाश्री जायसवाल का जन्म १९७८ में २५ जून को हुआ हैl अमरोहा में जन्मीं हैंl वर्तमान में नोएडा स्थित सेक्टर-६२ में निवासरत हैंl उत्तर प्रदेश से सम्बन्ध रखने वाली इलाश्री जायसवाल की शिक्षा-एम.ए.(हिंदी-स्वर्ण पदक प्राप्त) एवं बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-हिंदी अध्यापन हैl लेखन विधा-कविता,कहानी,लेख तथा मुक्तक आदि हैl इनकी रचनाओं का प्रकाशन विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा पोर्टल पर भी हुआ हैl आपको राष्ट्रीय हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार व काव्य रंगोली मातृत्व ममता सम्मान मिला हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी-साहित्य सेवा हैl इनके लिए जीवन में प्रेरणा पुंज-माता तथा पिता डॉ.कामता कमलेश(हिंदी प्राध्यापक एवं साहित्यकार)हैंl

Hits: 13

आपकी प्रतिक्रिया दें.