सफ़रनामा 

सोनू कुमार मिश्रा
दरभंगा (बिहार)
*************************************************************************
चलते राह में,वक्त की छाँव में,राहगीर मिल जाते हैं,
पल-दो-पल का साथ होता है,फिर वे बिछड़ जाते हैं।
बस कुछ शेष रह नहीं जाता,उनके यादों के सिवा,
सब-कुछ साथ ले जाते हैं,बस यादें छोड़ जाते हैं।
न मिलने का हर्ष होता है,न बिछड़ने का अवसाद,
पल-दो-पल का साथ ही,दूर कर जाता है कई विषाद।
जब भी बैठते हैं,खाली वक्तों में,तब याद वे आते हैं,
सफर के हमसफ़र को,सफर के बाद ही भूल जाते हैं।
यही सफर है,मंजिल से पहले राहगीर मिल जाते हैं,
जीवन के उबाऊ,थकाऊ पल में,वे साथ निभाते हैं।
सफर वही जो,संघर्ष पथ पर चलना सिखाता है,
वह भला सफर कहाँ,जो फूलों के मार्ग सजाता है।
सफर तो वह है जो,काँटों पर चलना सिखाता है,
दरिया ही तैरना सिखाता है,सागर लहर दिखाता है।
उन्हीं अनजानी राहों पर वही,अजनबी फिर मिल पाते हैं,
सफर का वह सुहाना पल फिर लौट आता है।
बीते पलों को भूल नहीं पाते,नया पल साथ निभाते हैं,
यही जिंदगी का सफर है,लोग राह में छोड़ जाते हैं।
भूलते बिसरते ही सही,कभी-कभी वे याद आते हैं,
वे तो भूल गए हमें,लेकिन हम यादों के सहारे
फिर सफर पर निकल जाते हैं।
परिचय-सोनू कुमार मिश्रा की जन्म तारीख १५ फरवरी १९९३ तथा जन्म स्थान दरभंगा(बिहार )है। वर्तमान में ग्राम थलवारा(जिला दरभंगा)में रहते हैं। बिहार राज्य के श्री मिश्रा की शिक्षा -स्नातकोत्तर(हिंदी) है। आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक हैं। सामाजिक गतिविधि के तहत समाजसेवी हैं। लेखन विधा-कविता है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक चेतना जागृत करना औऱ वर्तमान में मातृभाषा हिन्दी का प्रचार करना है। 

Hits: 30

आपकी प्रतिक्रिया दें.