हमारा वतन

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’
रावतसर(राजस्थान) 
*********************************************************************************

इस दुनिया में सबसे न्यारा देश हमारा है,
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है।

इसकी आजादी की खातिर कितने प्राण गंवाये,
कष्ट अनेक झेले हैं आजाद तभी हो पाये।
देकर के कुर्बानी माँ का कर्ज उतारा है,
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है।

इसके पर्वत नदिया हमको लगती बहुत सुहानी,
पतित पावनी माता गंगा सब नदियों की रानी।
धोती पाप सभी को भव से पार उतारा है,
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है।

मंदिर,मस्जिद,और गुरुद्वारे चर्च सभी हैं प्यारे,
हिंदू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई भाई सभी हमारे।
वंदे मातरम् जन गण मन जन जन का नारा है,
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है।

प्राण वायु देती है हमको वृक्षों की हरियाली,
मिट्टी की सौंधी-सी खुशबू है मन हरने वाली।
माँ की ममता धरती में विश्वास हमारा है,
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है।

धरती माता है ये अपनी हम हैं इसके लाल,
देकर के अनमोल खजाने करती हमें निहाल।
उत्तर का रखवाला पर्वत राज हमारा है,
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है।

गांधी,नेहरू,लालबहादुर सभी देश के प्यारे,
राजगुरू,सुखदेव,भगत,आजाद सभी मतवारे।
आज एक निर्भीक शख़्स नेतृत्व हमारा है,
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है।

सब धर्मों का हामी है ये भारत देश हमारा,
अमन चैन से सब रहते हैं सबका देश दुलारा।
वतन की खातिर हमने अपना तन-मन वारा है,
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है।

भारत माता की जय बोलें गीत वतन के गायें,
आज वतन आजाद हमारा घी के दीप जलायें।
आसमान में लहरा रहा तिरंगा प्यारा है।
हमको तो प्राणों से प्यारा देश हमारा है॥

 परिचय-शंकरलाल जांगिड़ का लेखन क्षेत्र में उपनाम-शंकर दादाजी है। आपकी जन्मतिथि-२६ फरवरी १९४३ एवं जन्म स्थान-फतेहपुर शेखावटी (सीकर,राजस्थान) है। वर्तमान में रावतसर (जिला हनुमानगढ़)में बसेरा है,जो स्थाई पता है। आपकी शिक्षा सिद्धांत सरोज,सिद्धांत रत्न,संस्कृत प्रवेशिका(जिसमें १० वीं का पाठ्यक्रम था)है। शंकर दादाजी की २ किताबों में १०-१५ रचनाएँ छपी हैं। इनका कार्यक्षेत्र कलकत्ता में नौकरी थी,अब सेवानिवृत्त हैं। श्री जांगिड़ की लेखन विधा कविता, गीत, ग़ज़ल,छंद,दोहे आदि है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-लेखन का शौक है।

Hits: 2

आपकी प्रतिक्रिया दें.