हर साँस में तू… 

नेहा लिम्बोदिया
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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दिन ढलने को है,
शाम होने को है
तेरी याद बार- बार
क्यों आने को है।
कमबख्त क्यों,
न जाने को है ?
पल दो पल मेरे,
रहने दे बस मुझे
ये जिंदगानी जीने दे।
पता है न मेरे रोम-रोम
हर साँस में बसा है तू,
फिर क्यों इतना,
परेशां करता है तू॥

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