हसरतों को दबाकर…

अंकित अशोक कुमायूं ‘अंकित’
इंदौर(मध्यप्रदेश)

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तू ख्याल कर,मैं बयां करूँ,लिखकर,
तू सवाल कर,मैं जवाब दूँ,ढूंढकर।
मैं खामोश हूँ पर जिंदा हूँ तुझे,सुनकर,
मैंने याद करके तुझे,आसमां में देखा,
तू टूट गया तारा,बनकर।
मैं ढूंढ रहा था राहों को,रास्ता बनकर,
तू सामने आ गया मंजिल,बनकर।
मैं सिसक रहा था आहों-सा,
तूने दिल को तसल्ली दिला दी,हमसफर बनकर।
मेरी जिंदगी का ख्वाब है गीत लिखने का, 
मेरे हाथ में कलम है,पास में लफ्ज,
तुझे लिखता हूँ मैं,बहुत सोच-समझकर।
कुछ हो या ना हो पर खुश रहता हूँ,
हसरतों को दबाकरll 
परिचय :अंकित अशोक कुमायूं की जन्मतिथि १० अक्टूबर १९८८ और जन्म स्थान इंदौर(मध्यप्रदेश)है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘अंकित’ है। वर्तमान में इंदौर के मुराई मोहल्ला(जूनी इंदौर) में बसे हुए हैं। बारहवीं तक शिक्षित श्री कुमायूं का कार्यक्षेत्र-नौकरी है। लेखन विधा-गीत है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-शब्दों को पहचान दिलाना है। माया नगरी बम्बई में रहकर भी फिल्मों में लेखन कार्य में अनुभव लिया है 

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