हिंदी के कुलदीपक…भारतेंदु

मंगल प्रताप चौहान
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)

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गिरिधर गोपालदास की छत्रछाया में पले-बढ़े थे,
अल्पायु में ही दिखलाया चतुर्दिशा का हर एक बिंदु।
हिंदी,हिंदू,हिंदुस्तान का उदघोष किया,
कहलाए आधुनिक हिंदी के पितामह भारतेंदु॥
हिंदी भाषा की नींव रखी,
रीतिकालीन गलियारों से।
मातृभाषा की सेवा में लगे,
तन-मन-धन हृदय विकारों से॥
हिन्द के हिंदी कुलदीपक थे,
निज भाषा के अनमोल उदघोषक थे।
अल्पायु में ही अमर हो गए,
ऐसे हिन्द के अमर हिंदी संयोजक थे॥
परिचय-मंगल प्रताप चौहान की जन्मतिथि २० मार्च १९९८ और जन्म स्थान-ग्राम अकछोर राबर्ट्सगंज, जिला सोनभद्र(उत्तर प्रदेश) है। यहीं आपका निवास है। वाणिज्य से स्नातक श्री चौहान ने यू.जी.डी.सी.ए., डी.एल.एड.,एन.एस.एस. और एन.सी.सी. की शिक्षा भी ली है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षा,साहित्य एवं समाजसेवा है। सामाजिक गतिविधि के तहत आप समाज में व्याप्त नकारात्मक शक्तियों को अपनी कलम की लेखनी से उखाड़ फेंकने की क्षमता के साथ सक्रिय हैं। इनकी लेखन विधा-कविता एवं लेख है। दिल्ली स्थित प्रकाशन से आपकी रचना का प्रकाशन हुआ है। ऐसे ही हरियाणा तथा अन्य के समाचार पत्रों में भी आपकी मुख्य रचनाएं छपी हैं। मंगल प्रताप चौहान की लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा को बढ़ावा देना और अपनी लेखनी से सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

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