हिंदी के निर्भीक सेनानी बालकवि बैरागी को नमन

डॉ.एम.एल.गुप्ता ‘आदित्य’ 
मुम्बई (महाराष्ट्र)

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लोकप्रिय कवि और हिंदी के प्रबलतम समर्थकों में से एक बालकवि बैरागी का ८७ साल की उम्र में निधन हो गया। वे साहित्य के साथ साथ राजनीतिक जगत में भी काफी सक्रिय रहे और सांसद रहे। वे हिंदी काव्य मंचों पर काफी लोकप्रिय थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने मध्य प्रदेश में अपने निवास स्थान पर अंतिम सांस ली।
एक सांसद के रूप में भी काफी समय तक संसदीय राजभाषा समिति के सदस्य रहे और संसदीय समिति के निरीक्षणों में वे नौकरशाहों को राजभाषा नीति का उल्लंघन करने और ठीक से पालन न करने के लिए हड़काते रहे और उन पर राजभाषा नीति का पालन करने के लिए दबाव बनाते रहे।
हमारे कई मित्र जो केन्द्रीय कार्यालयों बैंकों,उपक्रमों व संस्थानों आदि में राजभाषा के पदों पर रहे हैं या हैं वे उनके अनेक किस्से सुनाते थे कि किस प्रकार बालकवि बैरागी राजभाषा निरीक्षणों में पूरी गंभीरता के साथ और बारीकी से निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को हिंदी में कार्य करने के लिए विवश करने का प्रयास करते थे। इससे केन्द्रीय कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने में काफी मदद मिली। सरकारी निर्णय गांव में और एक सांसद के तौर पर भी वे सदैव एक मजबूत स्तंभ की तरह हिंदी के साथ खड़े रहे।
मैं समझता हूं ऐसा कम ही लोग कर पाते हैं और यह उनका हिंदी के प्रति एक महत्वपूर्ण योगदान रहा। महान हिंदी सेवी और हिंदी साहित्य के तपस्वी साहित्यकार बाल कवि वैरागी विजय सिंह को वैश्विक हिंदी सम्मेलन(मुंबई) की विनम्र श्रद्धांजलि,शत-शत नमन,वंदन।

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