हिंदी दिवस

नीरज सिंह राजपूत
बलिया (उत्तर प्रदेश)
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हिन्दी दिवस विशेष …………………..


जो दुश्मनों को प्यार से अपना बनाती है,
जो हर धर्म को एक धागे से बांध जाती है।
देवनागरी में जो देवों की गाथा सुनाती है,
वो हिंदुस्तान की भाषा है,जो हिंदी कहलाती है…॥

राधा-कृष्ण के प्रेम की भाषा ये हिंदी है,
हमारे विश्वगुरु भारत की आशा ये हिंदी है।
ये हिंदी है जिसने विश्व को प्रेम सिखाया है,
हर हिंदुस्तानी के दिल की अभिलाषा ये हिंदी है…॥

ये हिंदी ‘माँ’ हमारी है,जिसने जीना सिखाया है,
हिंदी के कवियों ने,विश्व को पंक्तियों पे झुमाया है।
ये हिंदी वो है जो हिंदुस्तान की हर गली में रहती है,
हमारे विवेकानंद जी ने हिंदी में विश्व में इतिहास बनाया है…॥

जो अंग्रेजी को हिंदी से ऊँचा बताते हैं,
अंग्रेजी के दो शब्दों से अपनी शान बढ़ाते हैं।
उन नासमझ समझदारों को इतना समझा देना,
आज़ाद होकर भी,वो अंग्रेजों के गुलाम कहलाते हैं…॥

माँ सरस्वती की वीणा के बोल हैं हिंदी में,
हर रांझा और हीर के हमजोली हैं हिंदी में।
ये हिंदी है हमारी संस्कृति और विरासत की जननी,
हर त्योहार की मस्ती और दिल का शोर है हिंदी में…॥

मीरा और कबीर के गीतों में हिंदी है,
श्रीकृष्ण और सुदामा के मीतों में हिंदी है।
कवियों का कहना है कि भारत की पहचान हिंदी है,
न कोई धर्म है,न जात है,हर इंसान हिंदी है…॥

परिचय-नीरज सिंह राजपूत की जन्मतिथि-१४ फरवरी १९९९ तथा जन्म स्थान-बलिया (उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में आप ग्राम ज़ीराबस्ती(बलिया)में रहते हैं। नीरज सिंह फिलहाल विद्यालय स्तर पर अध्ययनरत हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,लेख और कहानी है। आपके लेखन का उद्देश्य-मन के भावों का प्रदर्शन करना है। 

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