हिंदी प्रेमी हैं सभी

छगन लाल गर्ग “विज्ञ”
आबू रोड (राजस्थान)
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(रचना शिल्प:भ्रमर दोहा-२२ गुरू,४ लघु)
हिंदी प्रेमी हैं सभी,शिक्षा देती सुजान।
मीठी भाषा नागरी,आभा मोती रुझान॥
(सुभ्रमर-२१ गुरू,६ लघु )
हिन्दी सभी संसार में,प्राणी लेते बोल।
माँ नेही-सी संगिनी,बोली है अनमोल॥
(शरभ-२० गुरू,८लघु)
सरल साधना हिन्दी की,डूबे चित संसार।
हैं वाणी में दिव्य का,भरा-पूरा अंबार॥
(श्येन-१९गुरु,१० लघु)
शब्द ज्ञान भंडार हैं,हिन्दी भाषा जान।
मोती रूपी चमक हैं,जोड़ो चेतन भान॥
(मण्डूक-१८ गुरू,१२लघु)
खेलो हैं मैदान भी,हिन्दी जगत विशाल।
देवी माँ की कोख में,साधक विपुल निहाल॥
(मर्कट-१७ गुरू,१४ लघु)
चाहो हिन्दी मात को,भरो प्राण उल्लास।
बोली नेह निखारती,वितरित मन विश्वास॥
(करभ दोहा-१६ गुरु,१६ लघु)
जानो मीठी मात-सा,हिन्दी लोक अनूप।
मोह भरी चित रसमयी,सुन्दरता अनुरूप॥
(नर-१५ गुरू,१८ लघु)
हिन्दी दिवस सभी सुमरे,शारद दो मति दान।
शासक नायक नींद में,जाग करें सम्मान॥
(हंस-१४ गुरु,२०लघु)
करो भरोसा साधना,भाषा सरल उदार।
देव रश्मि तन मन धन,चाहे हिन्द विचार॥
(गयंद-१३ गुरु,२२ लघु)
जग चाहे मंजुल मना,रसमय हिन्दी जान।
परिचय-छगनलाल गर्ग का साहित्यिक उपनाम `विज्ञ` हैl १३ अप्रैल १९५४ को गाँव-जीरावल(सिरोही,राजस्थान)में जन्मे होकर वर्तमान में राजस्थान स्थित आबू रोड पर रहते हैं, जबकि स्थाई पता-गाँव-जीरावल हैl आपको भाषा ज्ञान-हिन्दी, अंग्रेजी और गुजराती का हैl स्नातकोत्तर तक शिक्षित श्री गर्ग का कार्यक्षेत्र-प्रधानाचार्य(राजस्थान) का रहा हैl सामाजिक गतिविधि में आप दलित बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत हैंl इनकी लेखन विधा-छंद,कहानी,कविता,लेख हैl काव्य संग्रह-मदांध मन,रंजन रस,क्षणबोध और तथाता (छंद काव्य संग्रह) सहित लगभग २० प्रकाशित हैं,तो अनेक पत्र-पत्रिकाओं में भी रचनाएं प्रकाशित हुई हैंl बात करें प्राप्त सम्मान -पुरस्कार की तो-काव्य रत्न सम्मान,हिंदी रत्न सम्मान,विद्या वाचस्पति(मानद उपाधि) व राष्ट्रीय स्तर की कई साहित्य संस्थानों से १०० से अधिक सम्मान मिले हैंl ब्लॉग पर भी आप लिखते हैंl विशेष उपलब्धि-साहित्यिक सम्मान ही हैंl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का प्रसार-प्रचार करना,नई पीढ़ी में शास्त्रीय छंदों में अभिरुचि उत्पन्न करना,आलेखों व कथाओं के माध्यम से सामयिक परिस्थितियों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास करना हैl पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद व कवि जयशंकर प्रसाद हैंl छगनलाल गर्ग `विज्ञ` के लिए प्रेरणा पुंज- प्राध्यापक मथुरेशनंदन कुलश्रेष्ठ(सिरोही,राजस्थान)हैl

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