हिंदुस्तान को ढूंढा जाए

हरिओम माहोरे `हरी`
सारसवाड़ा(मध्यप्रदेश)

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गद्दारों को मारा जाए,
फिर इंकलाब बोला जाए।

माँ-बाप को घर से निकालते जो,
जहाँ से उनको निकाला जाए।

मन्दिर-मस्जिद अर गुरुद्वारा,
सबको सम्भाल कर रखा जाए।

आओ सब मिलकर हँसता उस,
हिंदुस्तान को ढूंढा जाए।

फाँसी को जो हार समझ बैठे,
उन वीरों को याद किया जाए।

फिर देश में अब्दुल कलाम अर,
वो अमर आजाद लाया जाए।

मिटाकर गिले-शिकवे सब दुनिया,
ख़ुशी का रंग अब बिखेरा जाए।

ए लड़कों इन लड़कियों पर नहीं,
अब अपने वतन पर मरा जाए।

उल्फ़त में अब तो आशिक़ भी,
है लगाता बस तड़का जाए।

इश्क़ मोहब्बत दिल के फसाने,
इन पर गीत-ग़ज़ल लिखा जाए।

इन आँखों ने नए ख़्वाब देखे,
उन ख़्वाबों को ही पढ़ा जाए।

‘हरी’ तुझसे दूर रहकर जाना,
तेरे बिना अब न जिया जाए।

परिचय –हरिओम माहोरे का साहित्यिक उपनाम ‘हरी’ है। आपकी जन्मतिथि २९ दिसम्बर १९९८ एवं जन्म स्थान ग्राम-सारसवाड़ा(जिला-छिंदवाड़ा,म.प्र.)है। वर्तमान और स्थाई पता सारसवाड़ा, छिंदवाड़ा ही है। शिक्षा १२ वीं तक प्राप्त की है। इनका कार्यक्षेत्र-बाजार है। लेखन विधा-ग़ज़ल है। श्री माहोरे को प्राप्त सम्मान में सँस्कार भारती पलवल हरियाणा कविता सम्मान-पत्र है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक सुधार करते रहना है।

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