हिन्दी दिवस उत्सव

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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हिन्दी दिवस स्पर्धा विशेष………………………………

कार्यालय से घर जाने का समय हो रहा था कि,यकायक बॉस ने सभी को
कान्फ्रेन्स कक्ष में उपस्थित होने को कहा…समझ नहीं आ रहा था कि,अचानक सूर्यास्त के बाद बॉस को क्या हो गया,..कौन-सा तूफान आ गया। कर्मचारियों ने अपनी नींद को ताक पर रख,कान्फ्रेन्स कक्ष की तरफ रूख किया।
साहब भी कुछ अलसाए थे,लेकिन पप्पू की कड़क चाय ने साहब को दो उबासी
के बाद ताजगी से भर दिया। सभी ने स्थान ग्रहण किया और साहब के मुंह
को निहारने लगे। कुछ ने साहब के बालों को घूरा तो किसी ने कपड़ों से अन्दाज लगाया कि,माजरा क्या है।
अचानक बॉस ने सीधे विषय पर आते हुए आदेश फरमाया कि सरकार का आदेश आया है कि,हिन्दी को बढ़वा देने के लिए,उसे प्रचारित करने के लिये पूरे सप्ताह हम सभी हिन्दी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करेंगे,हिन्दी के प्रचार के लिए नित-नए कार्यक्रम रखे जाएं। मण्डे से फ्राईडे तक ज्यादा से ज्यादा पत्राचार हिन्दी में हो,बॉस की इस मंशा को सभी ने कड़वी दवाई की मानिंद गटक लिया। वरिष्ठ लेखापाल को पूरे वीक सेलिब्रेशन का कण्ट्रोलिंग अथारिटी नियुक्त किया गया। व.लेखापाल का कामकाज वैसे तो नगद ट्रांजेक्शन का है,लेकिन जी.एस.टी. के बाद अब बड़े साब ऑनलाईन,और केशलेस के पक्ष में हैं।
बॉस के आदेश का असर तुरन्त अमल में लाया गया। हिन्दी-डे सेलिब्रेशन का
आमंत्रण ईमेल,व्हाटस-एप,फेसबुक के जरिए पोस्ट किया गया,चूंकि जमाना
हाईटेक है इसलिए वक्त के साथ चलना आज की मजबूरी है। हिन्दी वीक
सेलिब्रेशन के अंतिम दिन पूरा कार्यालय हिन्दी वर्णमालाओं के अक्षरों से सुसज्जित था। कहीं क,ख,ग तो कहीं क्ष,त्र,ज्ञ तक के सारे अक्षर अपने अस्तित्व पर मुस्करा रहे थे,वहीं गुब्बारे भी रंग-बिरंगी छटा बिखर रहे थे,गुब्बारे पर भी हिन्दी को प्रचारित करने वाले वाक्य गदगद हो रहे थे। बॉस के आते ही सने एक स्वर में…गुडमार्निग किया। साहब भी भावना में बह गए,उन्होंने भी बखूबी वेल्कम कर अभिवादन को स्वीकार किया। माथे पर सल लिए बॉस ने भी आते ही सारी फाईल अपनी टेबल पर बुलवा ली। सारे क्लर्क,केशियर, अकाउण्टेट तथा प्यून अपने पूरे वीक के कार्य डिटेल बगल में दबाए खड़े थे। अटेण्डेस रजिस्टर देखकर बॉस भन्ना गए,उनका माथा चकरा गया कि सभी की उपस्थिति तो हण्ड्रेड पर्सेंन्ट थी,लेकिन सभी एम्पलाई ने अपने सिग्नेचर अंग्रेजी में किए थे। कॉरास्पॉण्डेट फाईलें देखी तो सभी ईमेल अंग्रेजी में थे,पत्र व्यवहार से लेकर दैनिक व्यवहार तक सब-कुछ अंग्रेजी भाषा में देखकर दो बाबू के इन्क्रीमेण्ट रोके,तीन को लताड़ लगाई,और शाम को सभी को प्रोग्राम में अटेण्ड रहने का कहते हुए मीटिंग समाप्त की।
सेकण्ड हॉफ में एक-एक करके सभी हिन्दी वीक के समापन अवसर पर पहुंचे। पूरा हॉल खचाखच भरा था एक-एक करके सभी ने अपनी कुर्सी रिजर्व की और चीफ गेस्ट के आने का इन्तजार खत्म हुआ। गुब्बारे और अक्षरों के झूलने
से उत्साह पूरे चरम पर था। माईक से हेलो टेस्टिंग..माईक टेस्टिंग का स्वर, प्रोगाम स्टार्ट करने-होने का संकेत दे रहा था। चीफ गेस्ट के आते ही सभी ने खड़े होकर सम्मान दिया। बॉस ने चीफ को गुलदस्ता देकर सम्मान किया। बड़ी मैडम ने माईक संभाला और बॉस की भूरी-भूरी तारीफ करते हुए ‘हिन्दी वीक सेलिब्रेशन’ का पूरा श्रेय बॉस को दे डाला। बॉस भी फूले जा रहे थे प्रमोशन पाने के लिए। उनकी तारीफ तपते रेगिस्तान में सावन की फुहार थी।
……खैर,दो शब्द की मनुहार होते ही बॉस ने अपने अंग्रेजी सूट तथा टाई को संभालते हुए…अपना उदबोधन शुरू किया-“लेडिज एण्ड जेण्टलमेन। आज बड़ा पावन दिन है,जब हम हिन्दी
वीक को सेलिब्रेट कर रहे हैं। हिन्दी हमारी नेशनल लैंग्वेज है,जन-जन की भाषा है,इसलिए हम सभी को हिन्दी का ज्यादा से ज्यादा यूज करना चाहिए। गुड मॉर्निंग से लेकर गुड नाईट तक जितना हम हिन्दी शब्दावली का यूज करेंगे,उतना हिन्दी का विकास होगा। इस पूरे वीक, हमारे डिपार्टमेण्ट ने हिन्दी को प्रमोट किया,सिग्नेचर से लेकर डिस्पेच तक ईमेल,फैक्स सब-कुछ हिन्दी में करने का प्रयास किया,..इन्हीं शब्द पुष्पों के साथ थैंक्यू वेरी मच कहकर बॉस ने अपनी वाणी को विराम दिया। देखते ही देखते डिस्पोजल में ३ चिप्स,चुटकी भर मिक्चर,१ ठंडा गुलाबजामुन और १ मुरझाए समोसे ने प्रोग्राम को सम्पूर्णता प्रदान की। इस तरह,आखिरकार हिन्दी वीक का सेलिब्रेशन सम्पन्न हुआ।
(विशेष-व्यंग्य विधा और अंग्रेजी में हिन्दी दिवस मनाने की भावना की अभिव्यक्ति की वजह से ही इस रचना में अंग्रेजी शब्दों का उपयोग यथावत रखा गया है। प्र.सं.)

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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