हूँ मैं तन्हा…

सुरेश जजावरा ‘सुरेश सरल’
छिंदवाड़ा(मध्यप्रदेश)
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हूँ मैं तन्हा मगर तन्हा तो नहीं,
तेरी यादें हैं मगर तू तो नहींl
मेरे गीतों में कविताओं में तू रहती है,
मेरे मन है तू जिन्दा,मगर जिन्दा तो नहींl
हूँ मैं तन्हा…ll

मेरी आँखों में है,नजरों में नहीं,
मेरे दिल में भी है होंठों पे नहींl
इस तरह कैसे मैं जी पाऊंगा,
मैं हूँ जिन्दा,मगर जिन्दा तो नहींl
हूँ मैं तन्हा…ll

 
अब नहीं चाहतें हैं मिलने की,
अब नहीं आह है बिछड़ने कीl
अब तो निस्वार्थ निराकार प्रेम है अपना,
जिसमें बिछड़न और मिलन है ही नहींl
मैं हूँ तन्हा,मगर तन्हा तो नहीं,
तेरी यादें हैं,मगर तू तो नहींll 

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