हे शारदे माँ

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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हे शारदे माँ,हे शारदे माँ।
ज्ञान का भंडार दे माँ॥

वीणा पुस्तक धारिणी।
श्वेत हंस की वाहिनी॥
वीणा की झंकार दे माँ।
हे शारदे माँ,हे शारदे माँ॥

शष्य श्यामला धरा हो।
तेरी ही आशीष भरा हो॥
सबको अपना प्यार दे माँ।
हे शारदे माँ,हे शारदे माँ॥

मन विकारों को मिटाओ।
सत्य पथ पर चलाओ॥
ज्ञानामृत की धार दे माँ।
हे शारदे माँ,हे शारदे  माँ॥

तू है देवी स्वर की माता।
धन्य मेरा भाग्य विधाता॥
सुखमय-सा संसार दे माँ।
हे शारदे माँ,हे शारदे माँ॥

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1 Comment

  1. हिन्दी भाषा की समृद्धि में सहयोग करने वाले सभी कलमकारों को हार्दिक बधाई,

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