हैवानियत

दिप्तेश तिवारी `दिप`
रेवा (मध्यप्रदेश)

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कैसी आग लगी है,इन खूनी हैवान दरिंदों में,
हिंसा का बीज उगा है,इन हत्यारे बांझ परिंदो में।
कोई बैसाखी पकड़ा दो,इस लंगड़े-लूले शासन को,
लाल किले में लटका दें,हम चीरहरित दुःशासन को॥
क्या उन हैवानों के भीतर कोई इंसान नहीं था,
आग हवस की जलती थी तो क्या शमशान नहीं था।
थोड़ा तो सोचा होता ये बागों की कलियां हैं,
कई कई बहनों-बिटिया के,भाई-बाबा छलिया हैं॥
रो रही होगी मां छाती पीट-पीट के अपना,
सच करने को अपनी बिटिया के चाँद सितारों वाले सपना।
इन हैवानों ने तो अपना ही घर लूट लिया,
अपनी मक़्क़री करतूतों से हिन्द का नाम लुटा लिया॥
मैं पीड़ा का गायक किससे अपनी बात कहूँ,
अच्छे दिन की गुहार लगाने वालों से मैं क्या बात कहूँ।
जिस दिन मेरी बहना रात,घर को बिना डरे आ जाएगी,
उस दिन ही तो अच्छे दिन की किरणें घनघोर घटा में छाएगीll
परिचय- दीप्तेश तिवारी का साहित्यिक उपनाम `दीप` हैl आपकी जन्म तिथि १७ जून २००० हैl वर्तमान में आपका निवास जिला रेवा (म.प्र.)स्थित गोलंबर छत्रपति नगर में है। आप अभी अध्ययनरत हैंl लेखन में आपको कविता तथा गीत लिखने का शौक है। ब्लॉग भी लिखने में सक्रिय श्री तिवारी की विशेष उपलब्धि कम समय में ही ऑनलाइन कवि सम्मेलन में सम्मान-पत्र मिलना है।

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