हौंसला

 बुद्धिप्रकाश महावर `मन`

मलारना (राजस्थान)

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रोज सवेरे चिड़िया,
तिनके ले आती।
कमरे की इक ताक में,
वो घोंसला बनाती॥

मैं देख उसे धुत्कारता,
वो उड़ जाती।
कहीं से तिनका उठा,
फिर लौट आती॥

मैं सोचता जिद्दी कितनी,
है छोटी चिड़िया।
मेरे आशियाने में,
क्यों बनाती अपनी दुनिया॥

गुस्सा आता,उसे उड़ाता,
बार-बार लकड़ी से।
सहज भाव से उड़ जाती,
कमरे की खिड़की से॥

तिनके उठा झुंझलाहट में,
बाहर फेंक आता।
नन्हीं-सी चिड़िया का जुनून,
समझ नहीं पाता॥

खिड़की दरवाज़ा बन्द कर,
बैठ गया बाहर मैं।
कैसे बनाएगी नीड़,
सोया ओढ़ चादर मैं॥

दो घण्टे बाद जगा,
आँखें मली ओर देखा।
भोंओं के बीच तन गई,
गुस्से की रेखा॥

मैं बढ़ा आगे,चिड़िया
चीं-चीं कर उड़ गई।
रोशनदान की जाली से,
वेग-सी निकल गई॥

मैं बढ़ा आगे थोड़ा,
घोंसला हटाने को।
घर में फैले कचरे को,
फिर से उठाने को॥

पर देख उसे रूके कदम,
झुका मेरा गुरूर।
इक अंडा प्यारा-सा,
कुछ कह रहा था जरूर॥

हार गया मैं आखिर,
उसके हौंसले से।
अंडा फेंक न सका,
उसके घोंसले से॥

परिचय-बुद्धिप्रकाश महावर की जन्म तिथि ३ जुलाई १९७६ है। आपका वर्तमान निवास जिला दौसा(राजस्थान) के ग्राम मलारना में है। लेखन में साहित्यिक उपनाम-मन लिखते हैं।हालांकि, एक राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ने आपको `तोषमणि` साहित्यिक उप नाम से अलंकृत किया है। एम.ए.(हिंदी) तथा बी.एड. शिक्षित होकर आप अध्यापक (दौसा) हैं। सामाज़िक क्षेत्र में-सामाजिक सुधार कार्यों,बेटी बचाओ जैसे काम में सक्रिय हैं। आप लेखन विधा में कविता,कहानी,संस्मरण,लघुकथा,ग़ज़ल, गीत,नज्म तथा बाल गीत आदि लिखते हैं। ‘हौंसलों के पंखों से'(काव्य संग्रह) तथा ‘कनिका'( कहानी संग्रह) किताब आपके नाम से आ चुकी है। सम्मान में श्री महावर को बाल मुकुंद गुप्त साहित्यिक सम्मान -२०१७,राष्ट्रीय कवि चौपाल साहित्यिक सम्मान-२१०७ तथा दौसा जिला गौरव सम्मान-२०१८ मिला हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक एवं राष्ट्रीय जागृति,पीड़ितों का उद्धार, आत्मखुशी और व्यक्तिगत पहचान स्थापित करना है।

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