ज़रुरी है पृथ्वी की सुरक्षा

वाणी बरठाकुर ‘विभा’
तेजपुर(असम)
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    शरीर में ज्यादा उत्ताप महसूस करना ही गर्मी है। भारत की छः ऋतुओं में से गर्मी भी एक ऋतु है। गर्मी का मौसम साल में एक बार आता है। अंग्रेजी के अप्रैल महीने से जुलाई तक गर्मी रहती है। भारत वर्ष के हर राज्य में समान तापमान नहीं रहता है। मध्य भारत में गर्मी की मात्रा ज्यादा होती है। दिन में लू चलती है,जिसके कारण दिन में लोगों को घर से बाहर निकलने में तकलीफ होती है,लेकिन उत्तर पूर्व प्रदेशों में बाकी के प्रदेशों की तुलना में तापमान कम है। पृथ्वी को अपने कक्ष पथ पर सूर्य के चारों ओर एक बार परिक्रमा करने के लिए ३६५ दिन के १/४ दिन लगते हैं। इस दौरान २१ मार्च और २३ सितम्बर की स्थितियां जब सूर्य भूमध्य रेखा पर लम्बवत चमकता है,के कारण दोनों गोलार्द्धों में सर्वत्र दिन-रात बराबर होते हैं। २१ मार्च के बाद धीरे-धीरे पृथ्वी पर गर्मी बढ़ने लगती है।
जब सूर्य कर्क रेखा से लम्बवत चमकता है,तो इस समय उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य की सबसे अधिक ऊंचाई होती है,जिससे यहाँ दिन बड़ा और रातें छोटी होती हैं।इसलिए उत्तरी गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु होती है,यह स्थिति २१ जून को घटित होती है। इस स्थिति को कर्क संक्रांति या ग्रीष्म अयनांत कहते हैं।
     आजकल लोग कहते हैं, पहले से अब गर्मी बढ़ गई है। ये बात सच है और इसका कारण हम हैं,क्योंकि हम हमारे पर्यावरण पर खुद अत्याचार करते हैं। जंगल काटने तथा पहाड़ काटने के कारण बारिश कम होने लगी है। दिन-ब-दिन बढ़ती आबादी के कारण भी गर्मी बढ़ने लगी है। एक बात कहना चाहूंगी कि हमारी आदतों की वजह से भी हम ज्यादा गर्मी महसूस करते हैं। अगर गर्मी है,इसे सोचकर दिनभर पंखे और ए.सी. की ही हवा में रहेंगे तो इसके बिना गर्मी सहन नहीं कर पाएंगे। असमिया नियम के अनुसार,बैसाख से ही पंखे की हवा लेते हैं,लेकिन आजकल सालभर पंखे की हवा लेते हैं। खैर जो भी हो,कहावत है-‘जमाना बदल गया है।’ मानती हूँ,सच है जमाना बदल गया,लेकिन हमारे ही कारण पृथ्वी पर ‘ओजोन परत’ का स्तर फट गया है। अगर हम अभी भी हमारे पर्यावरण के बारे में नहीं सोचेंगे तो शायद पृथ्वी पर छः ऋतु के बदले एक या दो ऋतु ही रह जाएंगी। आइए,हम संकल्प करें कि हम हर हाल में हमारी पृथ्वी की सुरक्षा करेंगे और पर्यावरण सुखद बनाएंगे।
परिचय:श्रीमती वाणी बरठाकुर का जन्म-११ फरवरी और जन्म स्थान-तेजपुर(असम)है। इनका साहित्यिक उपनाम ‘विभा’ है।  वर्तमान में शहर तेजपुर(शोणितपुर,असम)में निवास है। स्थाई पता भी यही है। असम प्रदेश की विभा ने हिन्दी में स्नातकोत्तर,प्रवीण (हिंदी) और रत्न (चित्रकला)की शिक्षा पाई है। इनका कार्यक्षेत्र-शिक्षिका (तेजपुर) का है। श्रीमती बरठाकुर की लेखन विधा-लेख,लघुकथा,काव्य,बाल कहानी,साक्षात्कार एवं एकांकी आदि है। प्रकाशन में आपके खाते में किताब-वर्णिका(एकल काव्य संग्रह) और ‘मनर जयेइ जय’ आ चुकी है। साझा काव्य संग्रह में-वृन्दा,आतुर शब्द तथा पूर्वोत्तर की काव्य यात्रा आदि हैं। आपकी रचनाएँ कई पत्र-पत्रिकाओं में सक्रियता से छपती रहती हैं। सामाजिक-साहित्यिक कार्यक्रमों में इनकी  सक्रिय सहभागिता होती है। विशेष उपलब्धि-एकल प्रकाशन तथा बाल कहानी का असमिया अनुवाद है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-नूतन साहित्य कुञ्ज है। इनकी विशेषज्ञता चित्रकला में है। माँ सरस्वती की कृपा से आपको सारस्वत सम्मान (कलकत्ता),साहित्य त्रिवेणी(कोलकाता २०१६),सृजन सम्मान(पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी,तेजपुर २०१७), महाराज डाॅ.कृष्ण जैन स्मृति सम्मान (शिलांग),बृजमोहन सैनी सम्मान (२०१८) एवं सरस्वती सम्मान(दिल्ली) आदि मिल चुके हैं। एक संस्था की अध्यक्ष संस्थापिका भी हैं। आपकी रुचि-साहित्य सृजन,चित्रकारी,वस्त्र आकल्पन में है। आप सदस्य और पदाधिकारी के रुप में कई साहित्यिक संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-हिंदी द्वारा सम्पूर्ण भारतवर्ष एक हो तथा एक भाषा के लोग दूसरी भाषा-संस्कृति को जानें,पहचान बढ़े और इससे भारत के लोगों के बीच एकता बनाए रखना है। 

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1 Comment

  1. बहुत ही जानकारी पूर्ण लेख लिखा हैं. आदरणीय वाणी बरठाकुर को हार्दिक बधाई.

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