‘२.०’ चेतावनी देने में कामयाब

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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`रोबोट २ के निर्देशक-शंकर और कलाकार-रजनीकांत,अक्षय कुमार,एमी जैक्सन,आदिल हुसैन,सुधांशु हैंl दोस्तों, इसकी कहानी पर चर्चा नहीं करेंगे,लेकिन विशेष दृश्य प्रभाव,सीआईजी और एनिमेशन ग्राफिक्स पर चर्चा ज़रूर होगीl इस फ़िल्म का बजट ५५० करोड़ है,जिससे यह सबसे महंगी भारतीय फिल्म होने का गौरव प्राप्त करती हैl
ग्राफिक्स और वीएफएक्स कमाल के हैं,जो हॉलीवुड x मेन, किंग्समेंन की याद ताजा करते हैंl फ़िल्म की दक्षिण में १४९ करोड़ की एडवांस बुकिंग फ़िल्म की सफलता की ग्यारंटी दे रहे हैं,तो ३७० करोड़ में सेटेलाइट अधिकार बेचकर यह लागत के करीब पहुँच गई हैl यह फ़िल्म जो चेतावनी या सन्देश देती है,वह यह है कि बढ़ती तकनीकी सफलता यानी मोबाईल के नेटवर्क टॉवर से जो तरंगें(रेडिएशन) निकलती है,वह न केवल इंसानों के लिए हानिकारक है,बल्कि परिंदों के लिए भी नुकसानदेह हैl बढ़ती मोबाइल सेवाओं से तरंगों की मात्रा भी बढ़ रही है,जो इंसानी जीवन के साथ परिंदों की प्रजातियों को खात्मे की ओर ले जा रही हैl
बस इसी विषय को बड़े-बड़े ग्राफिक्स दृश्य प्रभाव से फिल्म में दिखाया गया हैl ध्यान देने योग्य बात यह है कि,एक सभाकक्ष में अटल जी और नेहरू जी की तस्वीरें टंगी दिखाई,तो महसूस हुआ कि देश में जो राजनीतिक द्वंद आजकल उफान पर है,उससे फिल्में अछूती है,जो अच्छा हैl


एक दृश्य जिसमें पक्षीराज(अक्षय कुमार) मोबाइल से बड़ा गरूड़ बनते हैं,वह ग्राफिक्स तो कमाल कर गया हैl कहानी में महज इतना बहुत होगा कि,जिस चिट्टी रोबोट को इंसानियत के लिए खतरा मानकर २०१० वाली रोबोट फ़िल्म के अंत में निष्क्रिय कर दिया गया था,चिकित्सक के वशीकरण से उसे फिर जगाकर पक्षीराज से लड़ने के लिए बुलाया जाता हैl
अंत में क्या होता है,यह जानने के लिए आपको फ़िल्म देखना पड़ेगीl फ़िल्म के अंत में एक सूत्र छोड़ा गया है ३.० का,यानी तीसरे भाग की तैयारी शुरू होने को हैl
पटकथा में कुछ खास नहीं है,और अब भारतीय दर्शक ब्लेक पेंथर,स्पाइडरमैन,आंटमेन,X मेन देख चुके हैं तो वीएफ़एक्स कमजोर लगेंगे,लेकिन भारतीय सिनेमा की तरक्की में यह फ़िल्म मील का पत्थर हैl इसमें कमजोरी सुपर हीरो ओर आत्मा की जंग की बात खलती है,क्योंकि यह फार्मूला मेट्रिक्स रिलोडेड की मैन में भी इस्तेमाल हुआ थाl निर्देशक शंकर को यह ख्याल रखना चाहिए था कि,रोबोट और आत्मा की जंग में जीत शांति की ही होगीl पक्षियों की जान बचाने के लिए इंसानों की जान ले ली जाए,यह भी तो अन्याय ही होगाl
अंतिम दृश्य में एक स्टेडियम में पक्षीराज और रोबोट की भिड़ंत में पूरा स्टेडियम नेस्तनाबूत हो जाता है,लेकिन जनता में किसी को खरोंच तक नहीं आती,थोड़ा हास्यास्पद लगता हैl
संगीत में ज्यादा कुछ लिखने को नहीं हैl मध्यांतर पर एक गाना कैलाश खैर का ठीक लगता है,दूसरा गाना अंत में भूल ही जाएl फ़िल्म का पहला भाग पकड़ बनाए रखता है,तो दूसरा बिगड़ाव पैदा करता है,लम्बा और पकड़ ठीली करता हैl
अदाकारों में रजनीकांत जो कर दे,वही अभिनय मान लिया जाता हैl अक्षय इसके पहले अब्बास मस्तान की अजनबी में नकारात्मक भूमिका निभा चुके हैंl इन्होंने बढ़िया अभिनय किया हैl एमी जैक्सन जो रोबोट बनी है,तो उससे अभिनय की उम्मीद ही बेकार हैl
फ़िल्म को कुल मिलाकर एक बड़े प्रयोग के लिए ३.५ सितारे देना बेहतर हैl

परिचय : इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl 

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