काव्यभाषा

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बेटी का आँचल

सुमित भारद्वाज मोहम्मदी खीरी(उत्तरप्रदेश) *********************************************************** भागी-भागी फिरती थी बेटी,खुद की जान बचाने को, उसके पीछे कगार थे चार...

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जलने लगे है वो

ललित प्रताप सिंह बसंतपुर (उत्तरप्रदेश) ************************************************ बड़ी बड़ी बातें करने लगे हैं वो, हद से भी ज्यादा जलने...

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मैं बेरोजगार हूँ,काम दो

राकेश कुमार चतुर्वेदी भंवरपुर(छत्तीसगढ़) ****************************************************************** मैं बेरोजगार हूँ,मुझे काम दो, कभी मुझे भरपेट भोजन मिला नहीं दाने-दाने के...

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अधूरी ख़्वाहिशें

कृणाल प्रियंकर अहमदाबाद(गुजरात) *********************** मोहल्ले के कोने में, रहती थी एक `ख़्वाहिश` हर शाम पुकारती, खिड़की पर होकर...

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काश! लौटकर बचपन आता..

काश! पुनः लौटकर वह प्यारा बचपन आता। ठुमुक-ठुमुक चलते हुए पाठशाला जाता॥ गुरूजी का डण्डा देख मन में ...

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नशेड़ी 

प्याला है 'मदिरा' से भर गया, नशा है उसमें डूबा हुआ; ज्यों देखा कुछ-कुछ मैं घुला नस-नस में...

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निज भाषा-हिन्दी

सूर कबीर तुलसी की वाणी, रहीम, जायसी जाय बखानी।    बिहारी मीरा केशव जानी,  विद्यापति ने कही कहानी। ...

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तृप्ति

तृप्ति अदभुत भाव पंच इंद्रियों से... मस्तिष्क को संदेश होता अनुभव... तृप्ति का अनेक तृष्णाओं का जनक... तृप्ति...

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जिन्दगी का  राज

सोचती हूँ दिन-रात,जिन्दगी का राज, संघर्ष का रूप,या ईश का वरदान। सूरज का उजाला या तम की कालिमा,...

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कैसे मैं मधुमास लिखूँ…!

पीर लिए अंतस-पुष्पों पर,कैसे सुरभि सुवास लिखूँ। सिसक रहे मन के उपवन में,कैसे मैं मधुमास लिखूँ॥ दर्द पिघलकर...