काव्यभाषा

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बासन्ती-सुषमा

आया बसन्त खिला है प्रसून का,     बाग अनोखा नया रस माता। मालती झूम रही मधु गन्ध...

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जियो और जीने दो

खुद जियो औरों को भी जीने दो। ये नारा हम भी दें और तुम भी दो॥    ...

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गुरू माँ की वंदना 

गुरु माँ के चरणों में वंदन हमारा, गुरु माँ के चरणों में वंदन हमारा। विशुद्धमती तुम हो विज्ञमती...

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श्याम तेरा नाम

हवा के हर झोंके में है श्याम तेरा नाम, मेरे जीने का है सार श्याम तेरा नाम। जो...

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कुरुक्षेत्र

वहाँ कौन बचा होगा रोने वाला मृत्यु के होते उस तांडव पर, वह युद्ध था भाई-भाई के बीच...

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किसी और से प्यार वो करने लगी है

अश्कों से बहती धार मुझसे ये कहने लगी है,  मुझसे नहीं किसी और से वो प्यार करने लगी...

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जीते हम डरते-डरते

जीवन सारा बीत गया फूटी गागर भरते-भरते, श्याम हो गई उजली चादर कालापन हरते-हरते। बिछे हुए शूलों की...

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हाय रे इश्क

उसकी चाहत में न जाने क्या-क्या कर बैठे, सुबह को शाम और रात को दिन समझ बैठे।   ...

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तुम भुलाना नहीं…

तुम कदम यह कभी भी उठाना नहीं, मा-पिता को कभी तुम सताना नहीं। भूख में प्यास में ध्यान...

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सुनो श्यामली

न जाने तुम कब और कैसे समाईं मुझमें, एक छोटी-सी चिंगारी की मानिंद और आज धधक रही हो,...