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जीते हम डरते-डरते

जीवन सारा बीत गया फूटी गागर भरते-भरते, श्याम हो गई उजली चादर कालापन हरते-हरते। बिछे हुए शूलों की...

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हाय रे इश्क

उसकी चाहत में न जाने क्या-क्या कर बैठे, सुबह को शाम और रात को दिन समझ बैठे।   ...

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तुम भुलाना नहीं…

तुम कदम यह कभी भी उठाना नहीं, मा-पिता को कभी तुम सताना नहीं। भूख में प्यास में ध्यान...

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सुनो श्यामली

न जाने तुम कब और कैसे समाईं मुझमें, एक छोटी-सी चिंगारी की मानिंद और आज धधक रही हो,...

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एक झूठ

  एक प्रसिद्ध पत्रिका में लिखी हुई समस्या उसे अपने एक परिचित की समस्या-सी लगी। थोड़ा-सा और पता...

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गुलाब भेजा है

किसी ने चूम के खत में गुलाब भेजा है, हसीं-हसीं-सा निगाहों को खाब भेजा है। उसे पता था...

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मानव बनो

तेरे जन्म का उद्देश्य क्या, जब मूल्य न तो शेष क्या। समझो है तुझमें विशेष क्या, अवगुण अनेक...

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प्रजातंत्र

तू यूँ ही बेगार-बेकार आदमी, तेरी नहीं कोई औकात आदमी तू केवल एक उपयोगी पुतला है, जो याद...

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प्रकाश

`विवेक विकास` अन्तरंग मित्र थे। मिलकर जो भी योजना बनाकर क्रियान्वित करते,उसमें सफलता के स्वर्णिम पायदान पर चढ़कर...

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तुम क्यूं हो गए विदा

  काश! तेरे नयनों से,मेरे नयनों की बात कर पाती झुकी हुई बोझिल पलकों पे कुछ ख्वाब सुला...