ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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कलाई पर सजा प्यारा विश्वास,
भाई-बहन के मिलन की आस।
रक्षाबंधन है प्यार का बंधन,
साथ हो इनका जीवन भर।
बहन-भाई का हो अभिनंदन,
सुख-दु:ख की सीमा नहीं बंधन।
भाई समझे बहना का दु:ख,
मिल-जुल बांटे सब सुख-दु:ख।
बहना की राह ताकते भाई,
मेरी प्यारी बहना कब आए ?
बहना भी राखी का फर्ज निभाए,
सब काम-धाम छोड़ मिलने आए।
साल में एक बार रक्षाबंधन आता,
बहन और भाई का प्यार संवारता।
पारिवारिक त्योहार भी जरूरी होता,
इसी बहाने सभी से मिलना होता।
सभी कड़वाहट उस दिन भूल जाते,
एक दिन मिलकर सब खुशी मनाते।
रोज की परेशानी आज भूल जाते,
आते-जाते, खुशी से समय बिताते।
एक-दूसरे का हालचाल पूछते,
एक-दूसरे का सुख-दु:ख बांटते॥