राधा गोयल
नई दिल्ली
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अपने घर को स्वर्ग बनाने के लिए
मैं दिन-रात मेहनत करती रही,
जीवन से समझौता करती रही
क्योंकि मुझे घर बचाना था,
अपने बच्चों को किसी लायक बनाना था
गृहस्थी को बर्बाद होने से बचाना था,
वह केवल कहता रहा
मैं सुनती रही
क्यों सुनती रही!
क्योंकि नहीं सुनती
तो घर में रोजाना का बवंडर होता,
अपने बच्चों की ज़िंदगी को सुखी करने के लिए
मैं चुपचाप अपमान को भी सम्मान समझकर जीती रही,
अब जब अपने सब दायित्वों से मुक्त हो गई
तब सोचा कि अपने शौक को थोड़ा समय दूँ,
जब ऐसा करने की कोशिश की
तब एकदम धक्का लगा
क्योंकि मेरे सपनों को पूरा होने से पहले ही मुझ पर ढेरों पाबंदियाँ लगा दी गईं।
“आखिर तुम्हारे इस शौक से तुम्हें क्या मिलता है ?
क्या इससे दो पैसे कमा पाती हो ?
कोई ऐसा काम करो ना
जिससे आय में वृद्धि हो”
कभी यह नहीं सोचा कि जब बच्चों की शादी कर दी है,
तो आय में वृद्धि करने से क्या होगा ?
कम से कम अब तो मुझे मेरे शौक पूरे करने दो,
मैं पिंजरे की पंछी बनकर नहीं रहूँगी
हमेशा उसके इशारों पर नहीं नाचूँगी,
जीवन भर उसी के इशारों पर चलती रही
क्या मिला ?
ये पिंजरा,
यह भी तो अभी पता लगा
कि सबने मुझे पिंजरे की मैना समझा था,
जब मुझे पता लगा कि मैं तो उनके पिंजरे की पंछी थी
उन्होंने मेरी फर्ज निभाने की आदत को,
अपना अधिकार समझ लिया था
दिमाग में बड़ी देर तक ऊहा-पोह की स्थिति बनती रही
क्या मुझे अब भी इनके इशारों पर नाचना होगा!
हरगिज नहीं…
अब तक मैं समझौते ही तो करती आई हूँ,
समझौता करने में मुझे अभी भी कोई दिक्कत नहीं है
क्योंकि मुझे अपने गृहस्थी बचानी है,
लेकिन अपने सपनों को कुर्बान करके नहीं
घुट-घुट कर नहीं जीना,
कोई कुछ भी कहता रहे
ठीक है
मैं शौक और सपनों में संतुलन बनाकर रखूंगी,
लेकिन ऐसा समझौता हरगिज मंजूर नहीं
जो मेरे सपनों के आड़े आए,
अब मेरे मन में जो आएगा
मैं वह करूँगी
मर्यादा की रेखा को पार नहीं करूँगी,
लेकिन अब केवल किसी के आदेशों का पालन नहीं करूँगी
अपनी इच्छाओं को दाँव पर नहीं रखूँगी,
मुझे भी अपनी इच्छा से जीने का हक है
और मैं वह हक भीख में नहीं माँगूगी,
क्योंकि किसी ने कहा है
“अधिकार भीख में नहीं मिलते,
अधिकार लड़ के छीन जाते हैं।”
यदि कर्तव्य निभाना मेरा फर्ज है,
तो मेरे कुछ अधिकार भी हैं
अब मैं अपने सारे शौक पूरे करूँगी,
जिसे जो बोलना है, बोलता रहे
यह भी सोच लिया है कि
यदि किसी ने यह धमकी दी, कि
घर छोड़कर चली जाओ
यह धमकी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूँगी
जो मुझे धमकी दे रहा है,
घर छोड़कर उसको ही जाना पड़ेगा
क्योंकि इस घर को घर मैंने बनाया है,
एक दिन भी आराम नहीं किया
सिर्फ काम काम और काम,
त्यौहार हो तो और ज्यादा काम
कोई ज्यादा चूँ-चपड़ करेगा
तो उसे घर का काम करने के लिए,
मुझे मेरी पगार भी देनी पड़ेगी
वरना अपना मुँह बंद रखें।
और मुझे बिना रोक-टोक के,
मेरे शौक को पूरा करने दें॥