सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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शिव द्वारे भीड़ भारी, भोले द्वारे शोभा न्यारी,
सजे धजे भोले भारी, सावन उत्सव लगे।
शिवालय गिरिराज, नमः नमः गणराज,
भूत लसे महाराज, रीत सुखदाई लगे।
मन भाव अर्पित, गोरस, तूरी अर्पित,
श्रद्धा सुमन अर्पित, विराट स्वरूप लगे।
नमः शिवाय शंकर, दिव्य स्वरूप शंकर,
जोरू अन्तर्मन कर, जियरा आह्लाद लगे।
सुरसुरि शिरोमणि, शिरोधर अहि फणि,
भावन त्रिशूल पाणि, मूरत मोहिनि लगे।
तन बाघाम्बर सजे, छटा कलानिधि सजे,
डुगडुगी हस्त सजे, मनभावन रुत लगे।
भक्त भक्ति रसपान, शिवाय नमः आह्वान,
शम्भू मस्त भगवान, भोले जयकारे लगे।
गिरिजा संगिनी सोहे, आँचल तनुज सोहे,
मूरत अद्भुत सोहे, रिमझिम मेह लगे।
शिववाहन वृषभ, दुःख हरण ऋषभ,
भीनी बयार सौरभ, नभ घनघोर लगे।
अभिषेक हर रोज, दर्श अरु हर रोज,
शत्-शत् नमन ‘सरोज’, सावन महात्म्य लगे॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।