डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’
सोलन (हिमाचल प्रदेश)
*******************************************
सतरंगी दुनिया-३८…
डकार और गैस एक ही माँ के २ बेटे हैं, मगर गैस ने गलत रास्ता चुन लिया है, इसलिए उसकी कोई इज्जत नहीं करता है। बहुत आसान है किसी पर अंगुली उठाना, परंतु बहुत मुश्किल है किसी को उठाने के लिए उसकी अंगुली पकड़ना। ज़िंदगी में इतनी गलतियाँ न करें कि पेन्सिल से पहले रबर घिस जाए और रबर को इतना मत घिसिए कि ज़िंदगी के पेज ही फट जाएं। रंग छोड़ते कपड़े और रंग बदलते इंसान चाहे कितने ही ब्रांडेड हों, उनकी कोई इज्जत नहीं करता है। किसी के गुस्से को उसकी नफरत समझने की भूल ना करें, क्योंकि गुस्सा वही करता है;जो आपकी फिक्र करता है।
स्टीकर और विश्वास दोनों एक समान है। दोबारा जरूरत पड़ने पर काम कम करते हैं। ‘पत्थर’ तब तक सलामत है, जब तक वो पर्वत से जुड़ा है। ‘पत्ता’ तब तक सलामत है जब तक वो पेड़ से जुड़ा है और ‘इंसान’ तब तक सलामत है, जब तक वो परिवार से जुड़ा है। परिवार से अलग होकर आजादी जरूर मिल जाती है, लेकिन संस्कार चले जाते हैं। ज़िंदगी एक परीक्षा है, काफी लोग इसमें फ़ैल हो जाते हैं, क्योंकि वे दूसरों की नकल करते है वे समझ नहीं पाते कि सबके पेपर अलग-अलग होते हैं। आजकल लोन देने के किए इतने फोन आते हैं, कि डर लगा रहता है कि अगर गेट खुला रह गया तो लोग पैसे फेंककर न चले जाएं। अगर आपको बुराई ढूंढने का शौक है, तो आईना खरीदिए, दूरबीन नहीं।
पत्नी ने सुबह उठते ही पति से नाश्ता बनाने के लिए कहा- यह सुनकर पति बाहर जाने लगा। पति ने बताया वकील के पास जा रहा हूँ तुमसे तलाक लेने हेतु। थोड़ी देर बाद पति घर वापस आया और सब्जी काटने लगा। पत्नी ने पूछा- क्या हुआ ? कुछ नहीं, वो वकील साहब भी घर में बर्तन मांज रहे थे। जानवरों के डॉक्टर दुनिया के सबसे अच्छे डाक्टर होते हैं, क्योंकि ये अपने मरीज से ये भी नहीं पूछते कि क्या हो रहा है। अजीब है ये दुनिया यहाँ हर कोई लम्बी उम्र जीना चाहता है, परन्तु बूढ़ा नहीं होना चाहता है। अजीब है देश हमारा- यहाँ सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है, लेकिन जनता की मर्जी से चलाई नहीं जाती है।
एक तरफ मामा-मौसी से अटूट लगाव, दूसरी तरफ चाचा-बुआ से गहरा मनमुटाव। यह रिश्तों का फर्क नहीं, बल्कि घर के अंदर हुए राजनीतिक खेल का नतीजा है। बचपन में स्कूल का वो भारी बैग उठाना आसान था, ज़िंदगी की जिम्मेदारियों का बोझ उसमें कहीं ज्यादा भारी निकला। कौन कहता है कि इसान रंग नहीं बदलता। किसी के मुँह पर सच बोलकर देखिए-एक नया रंग ही सामने आएगा। इस दुनिया में सभी चाहते हैं, कि रिश्ते सुधारें, पर चाहत यही है कि शुरुआत अगला करे। हमेशा पानी की तरह बनिए और अपना रास्ता स्वयं बनाइए। पत्थर की तरह मत बनिए, जो दूसरों का रास्ता भी रोक लेता है।
कुडंली में ‘शनि’, दिमाग में ‘मनी’ और व्यवहार में ‘दुश्मनी’ ये तीनों हमारे लिए अत्यंत हानिकारक है। इस दुनिया में लोग आपकी २ ही चीज उठाएंगें-फायदा और जनाजा। पतझड़ में ही रिश्तों की परख होती है, बारिश में तो हर पत्ता हरा दिखता है। कठिन समय ही बताता है, कि कौन अपना है और कौन सिर्फ चाल चल रहा है। सच को तो तमीज ही नहीं है बात करने की, झूठ को देखो-कितना मीठा बोलता है। बहुत दुनिया घूमने के बाद मुझे एक ही बात समझ आई कि सबसे ज्यादा सुकून अपने घर में ही है।
दामाद जी ससुर के सामने दुखड़ा रो रहे थे कि कैसे उनकी बेटी ने उनका जीना हराम कर दिया है। ससुर साहब भी सुनते-सुनते भावुक हो गये और बोले- बेटा क्या बताऊं ? सोचो, तुम्हारे पास जिस कपड़े का पीस है, मेरे पास उसका पूरा थान है थान। याद रखिए- बगावत हमेशा ईमानदार और स्वाभिमानी लोग ही करते हैं, चालाक लोग तो चापलूसी और तलवे चाट कर अपना काम निकालते हैं। किसी भी एक्स-रे में वो जख्म दिखाई नहीं देते, जो अपनों ने दिए हैं। पूरा ससुराल मिल के भी एक बहू को प्यार और अपनापन नहीं दे पाते हैं, लेकिन सभी एक बहू से उम्मीद रखते हैं कि वो अकेले ही सबको खुश रखे। स्वस्थ हमको ईश्वर करता है, पर डॉक्टर उसकी फीस वसूलता है।
जिसे जनता चुनती है, वो ससंद में बैठता है,
जिसे परमात्मा चुनता है, वह सत्संग में बैठता है।
परिचय-डॉ. प्रताप मोहन का लेखन जगत में ‘भारतीय’ नाम है। १५ जून १९६२ को कटनी (म.प्र.)में अवतरित हुए डॉ. मोहन का वर्तमान में जिला सोलन स्थित चक्का रोड, बद्दी (हि.प्र.)में बसेरा है। आपका स्थाई पता स्थाई पता हिमाचल प्रदेश ही है। सिंधी,हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले डॉ. मोहन ने बीएससी सहित आर.एम.पी.,एन. डी.,बी.ई.एम.एस., एम.ए., एल.एल.बी.,सी. एच.आर.,सी.ए.एफ.ई. तथा एम.पी.ए. की शिक्षा भी प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र में दवा व्यवसायी ‘भारतीय’ सामाजिक गतिविधि में सिंधी भाषा-आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का प्रचार करने सहित थैलेसीमिया बीमारी के प्रति समाज में जागृति फैलाते हैं। इनकी लेखन विधा-क्षणिका, व्यंग्य लेख एवं ग़ज़ल है। कई राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन जारी है। ‘उजाले की ओर’ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित है। आपको राजस्थान से ‘काव्य कलपज्ञ’,उ.प्र. द्वारा ‘हिन्दी भूषण श्री’ की उपाधि एवं हि.प्र. से ‘सुमेधा श्री २०१९’ सम्मान दिया गया है। विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अध्यक्ष (सिंधुडी संस्था)होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-साहित्य का सृजन करना है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद एवं प्रेरणापुंज-प्रो. सत्यनारायण अग्रवाल हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिले,हमें ऐसा प्रयास करना चाहिए। नई पीढ़ी को हम हिंदी भाषा का ज्ञान दें, ताकि हिंदी भाषा का समुचित विकास हो सके |