चिंतन

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धीमा जहर है मोबाइल लेकर सोना

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** विज्ञान वरदान के साथ अभिशाप भी होता है। आज मोबाइल हमारे जीवन का अनिवार्य अंग बन गया है और जो उपयोग करते हैं, वे मोबाइल के व्यसनी हो […]

आत्महत्याओं का बढ़ना बदनुमा दाग

ललित गर्गदिल्ली************************************** विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (१० सितंबर) विशेष…. बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं एक ऐसा बदनुमा दाग है, जो हमारे तमाम विकास एवं शिक्षित होने के दावों को खोखला करता […]

राष्ट्रीय चेतना जगाने आए थे धरती पर

ललित गर्गदिल्ली************************************** राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त (३ अगस्त) जन्म जयन्ती इतिहास और साहित्य में ऐसी प्रतिभाएं कभी-कभी ही जन्म लेती हैं, जो बनी बनाई लकीरों को पोंछकर नई लकीरें बनाते हैं। […]

भविष्य सुरक्षित बनाने की पहल जरुरी

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** चिंतन…. १५ अगस्त १९४७ को इंडिया गुलामी की जंजीरों से मुक्त हुआ और हमने अमन- चैन की सांस ली। उस समय सभी कौम ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। […]

अच्छा करने के लिए कष्ट आवश्यक नहीं

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** चिंतन.. दुनिया में अच्छा करने के लिए हमें इस जीवन में दु:ख की जरूरत नहीं है। हममें से कई लोगों का यह गहरा विश्वास है कि दुनिया में […]

मन की वेदना हरें

अरुण वि.देशपांडेपुणे(महाराष्ट्र)*************************************** मित्रों,हम सब खुद को हमेशा ही संवदेनशील मन का व्यक्ति समझते हैं। यह स्वभाव विशेष हमारा दायित्व बढ़ाने वाला है। मन की पीड़ा,अंतर्मन की वेदना किसी के साथ […]

क्या `मेडिकल क्वारेंटाइन` भी वास्तव में ‘सूतक’ ही ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** जिस देश ने दुनिया को ‘क्वारेंटाइन’ जैसा शब्द दिया,उसने शायद ही सोचा होगा कि `कोरोना` वायरस जैसी वैश्विक महामारी से उसी देश में चीन के बाद […]

इंसानी भक्षक `कोरोना` बना कुत्ते-बिल्लियों का ‘रक्षक’!

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** आज जब हमारा देश हिंदू-मुस्लिम वायरस से बाहर नहीं निकल पा रहा,पूरी दुनिया `कोरोना` वायरस के बढ़ते प्रकोप से घबराई हुई है,भारत सहित विश्व के शेयर […]

अब तो संवैधानिक रुप से सिंहासन पर बैठाओ

मनोरमा जैन ‘पाखी’ भिंड(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* हिंदी जानती है उसे सतत् बहते रहना है, बहते-बहते ही उसे यहाँ अक्षुण्ण रहना हैl मर जाते हैं लोग वो जो जड़ से टूटे हों, […]

हिंदी के राष्ट्रभाषा बनने की बुनियाद कमज़ोर है क्या ?

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. सौ बरस से अधिक समय हो गया हिंदी को राष्ट्रभाषा का अधिकार मिले,पर आज भी हिंदी सिर्फ हिंदी मानने वालों के कारण […]