जनसंख्या-संतुलन से ही सुखमय भारत
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जनसंख्या बढ़े विवेक से, तब सुखी परिवार बने,शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार का सबको अधिकार मिलेसीमित संसाधन कह रहे, सोचो अब हर बार सुमति,संतुलित जनसंख्या बने, सुख-समृद्धि का द्वार खुले। धरती माँ की गोदी सीमाओं से है बँधी हुई,जल, जंगल, उपवन सभी मानवता से है जुड़ी हुएसंयम, जागरूकता अपनाएँ, यही समय का ज्ञान,संतुलित जनसंख्या से, उज्ज्वलित हिन्दुस्तान बने। छोटा परिवार सदा सुख, शिक्षा … Read more