मेरे भीतर मेरा क्या है

श्रीकृष्ण शुक्ल मुरादाबाद(उत्तरप्रदेश)  ***************************************************************** तन भी नश्वर मन भी नश्वर, जरा सोच फिर,तेरा क्या है नहीं आज तक जान सका मैं, मेरे भीतर मेरा क्या है। ह्रदय सतत् स्पंदन करता,…

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भारत वंदना

प्रियांशु तिवारी ‘वात्सल्य’ लखनऊ( उत्तरप्रदेश) **************************************************************************** भाग-१ यहां चहकती सुबह होती, मतवाली हर शाम है होंठों पर यहां सबके होता, राम कृष्ण का नाम है। हर पल बहती रहती यहां…

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नारी सशक्तिकरण

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** नारी ने जब-जब अपनी शक्ति को पहचाना, पहचान में ही पहचान बनी उसकी नई पहचान। शक्ति का रूप है नारी,सतीत्व की पहचान, नारी से ही जन्मे…

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गाँव और शहर की यादें

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ कैसे भूलूँ मैं,बचपन अपना, दिल दरिया और,समुंदर जैसा। याद जब भी आये वो पुरानी, दिल खिल जाता है बस मेराl और अतीत में खो जाता हूँl…

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भीतरी दुश्मन

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* देश की सुरक्षा को, केवल बाहरी आतंक से ही नहीं, भीतर छुपे दरिन्दों से भी बचाना होगा। देश को जो अमानवीय तत्वों से, बचाने का…

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अगली पीढ़ी का बोझ कौन उठाएगा

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************** आग लगाने वाले आग लगा चुके, पर इल्ज़ाम हवाओं पे ही आएगा। रोशनी भी अब मकाँ देखे आती है, ये शगूफा सूरज को कौन बताएगा।…

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दिल अपना दोस्ताना रख

कैलाश भावसार  बड़ौद (मध्यप्रदेश) ************************************************* दिल अपना दोस्ताना रख, दोस्तों से मिलना-मिलाना रख। यूँ ही नहीं कोई बन जाता अपना, दिल में किसी के ठिकाना रख। जहाज के पंछी को…

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आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* 'आत्मजा' खंडकाव्य से अध्याय-६ वन मयूर को रहा न जाता, बिना बुलाये अपना दर्शक रंग-बिरंगे पंख खोल कर, किसे दिखाये नृत्य प्रदर्शक। चातक किसे सुनाये अपनी,…

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माँगता हूँ साथ तेरा ओ प्रिये

भानु शर्मा ‘रंज’ धौलपुर(राजस्थान) ***************************************************************** माँगता हूँ मैं शिवा से,साथ तेरा ओ प्रिये, जिंदगी की साँस मेरी,मीत है तेरे लिये। थाम के तू हाथ मेरा,जिंदगी की चल डगर, मैं मुसाफिर…

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जल है तो कल है

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** जल में ही है शक्ति जगत की, जल से ही है तृप्ति जगत की। जल ही कल है जीव जगत का, जल ही जीवन दान॥…

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